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किताबों में झलकेगी पहाड़ की 'पीड़ा'
देहरादून/आफताब अजमत
Updated Tue, 30 Jul 2013 07:58 PM IST
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केदारघाटी समेत पूरे गढ़वाल में बीते महीने आई आपदा से अब नौनिहाल अपनी किताबों के जरिए वाकिफ हो सकेंगे। एससीईआरटी वैज्ञानिक तथ्यों समेत पूरी आपदा का खाका बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में खींचने का मन बना चुकी है।
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16 और 17 जून को गढ़वाल में आई भीषण जलप्रलय के कारकों और इसके बाद पैदा हुए हालात और बचाव के तरीकों को लेकर अब स्कूली बच्चों को भी जागरूक किया जाएगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से सिलेबस में बदलाव की कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। जल्द ही आठवीं तक की किताबों में आपदा प्रबंधन का पाठ शामिल होगा।
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एससीईआरटी के निदेशक डा. एसके शील के मुताबिक किताबों में पहले से आपदा प्रबंधन से संबधित पाठ तो हैं लेकिन प्रदेश में आई जल प्रलय ऐतिहासिक तबाही है।
इससे परिणामों और इसकी वजहों के साथ ही बच्चों के लिए यह भी जानना जरूरी है कि कैसे ऐसी तबाही में खुद को बचाए रख सकते हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े सिलेबस को इसके लिए अपडेट किए जाने की योजना तैयार हो चुकी है।
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इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जो कि आठवीं तक के सिलेबस में बदलाव करेगी। डा. शील ने बताया कि हर साल आने वाली छोटी आपदाओं के मद्देनजर बच्चों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी सत्र 2014-15 में आठवीं तक की पाठ्य पुस्तकों में यह पाठ शामिल हो जाएगा।
अब यह भी पढ़ाया जाएगा
- तबाही के दिन का मौसम और दूसरे कारक।
- आपदा के बाद पनपे हालात और निपटने के उपाय।
- संचार माध्यमों के टूट जाने के बाद मुसीबत में बचाव के तरीके।
- जंगलों को बचाने, नदियों के किनारे न बसने की नसीहत भरा पाठ।