बीस दिन के भीतर एक और संवासिनी की मौत
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कुपोषण और बीमारी ने देहरादून स्थित नारी निकेतन की एक और संवासिनी की जान ले ली। दून अस्पताल में उपचार के दौरान मानसिक रूप से कमजोर बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। कुपोषण से बीस दिन के भीतर यह दूसरी संवासिनी की मौत है।
नारी निकेतन की संवासिनी रूपम (60) कुछ दिन से बीमार थी। बुधवार रात बेहोशी की हालत में उसे दून अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. महावीर की देखरेख में उपचार चल रहा था। बृहस्पतिवार देर रात संवासिनी की मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जबकि देखभाल के लिए अस्पताल में मौजूद नारी निकेतन कर्मचारी ने विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी। बीस दिन पूर्व नारी निकेतन की संवासिनी जमीला की भी कुपोषण से मौत हो गई थी। अब रूपम की मौत से नारी निकेतन प्रशासन में हड़कंप मच गया। शुक्रवार तड़के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और डाक्टरों से जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने भी किया था दौरा
28 दिसंबर को दून अस्पताल में कुपोषण से पीड़ित संवासिनी जमीला (60) की मौत हो गई थी। पिछले साल भी नारी निकेतन में पांच संवासिनियों की मौत हो गई थी। संवासिनियों की मौत से नारी निकेतन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
दो जनवरी को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी नारी निकेतन का दौरा किया था। नारी निकेतन प्रबंधन ने कर्मचारियों की कमी की बात कही थी। इस पर मुख्यमंत्री ने चार सामान्य संवासिनियों को ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बराबर वेतन देकर मानसिक कमजोर संवासिनियों की देखरेख का जिम्मा देने के निर्देश दिए थे।
नारी निकेतन के कर्मचारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि मानसिक कमजोर 81 संवासिनियों की देखरेख दो कर्मचारियों पर है। लेकिन इन संवासिनियों को भोजन खिलाना बड़ी चुनौती होती है। यही वजह है कि उनमें कुपोषण की दिक्कत अधिक है।
पढ़िए, क्या कहते हैं जिम्मेदार
मानसिक रूप से कमजोर संवासिनी का रक्तचाप काफी कम था। कुपोषण की वजह से उसे एनीमिया और अन्य बीमारियां हो गई थीं। ऐसी स्थिति में मरीज को ‘शॉक’ आने लगते हैं।
-डॉ. महावीर, संवासिनी का उपचार करने वाले चिकित्सक
रूपम पांच साल पूर्व ही नारी निकेतन में आई थी। तब भी उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस तरह की संवासिनियों को निकेतन में लाया जाता है तो उनकी हालत खराब रहती है।
-सरला रावत, प्रभारी, नारी निकेतन