गृह कलेश का दर्दनाक अंजाम, डेढ़ साल के बेटे संग मां ने खुद को किया आग के हवाले
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उत्तराखंड पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के कोटली गांव में एक महिला ने अपने डेढ़ साल के बच्चे समेत आग लगाकर मौत को गले लगा लिया। घटना की वजह गृह कलह बताया जा रहा है।
परिजनों और ग्रामीणों ने आग से बुरी तरह झुलसे मां-बेटे को बीरोंखाल सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डेढ़ साल के अक्षित उर्फ गोलू ने दम तोड़ दिया। महिला साधना देवी (30) पत्नी सुनील सिंह को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में रामनगर के लिए रेफर किया गया, जहां उसने भी दम तोड़ दिया।
सूचना मिलते ही राजस्व पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए पौड़ी भेज दिया। महिला का पोस्टमार्टम रामनगर पुलिस ने कराया है।
बंद कमरे के अंदर मां-बेटे बुरी तरह झुलसे हुए मिले
राजस्व उपनिरीक्षक सुभाष लिंगवाल ने बताया कि उन्हें मंगलवार रात कोटली गांव में एक महिला के आग लगाकर खुदकुशी के प्रयास की सूचना मिली।
रात को ही ग्रामीणों ने साधना देवी (30) पत्नी सुनील सिंह और उसके डेढ़ वर्षीय बेटे अक्षित उर्फ गोलू को अस्पताल में भर्ती कराया था। सुनील सिंह दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। गांव में सुनील की मां बूथी देवी, नौ साल की बेटी अनीषा, डेढ़ साल का बेटा अक्षित और पत्नी साधना रहते थे।
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि मंगलवार रात मृतका की सास बूथी देवी और बेटी अनीषा पड़ोस में गई थी। तभी घर से चीखने चिल्लाने की आवाज आई। घर के एक बंद कमरे के अंदर मां-बेटे बुरी तरह झुलसे हुए पाए गए। राजस्व पुलिस ने मृतका साधना के मायके घटना की जानकारी दी।
ससुरालियों की प्रताड़ना का परिणाम
सूचना मिलते ही मृतका की मां विलोचन देवी कोटली गांव पहुंची। बेटी की मौत की खबर से बदहवाश विलोचन देवी ने घटना को ससुरालियों की प्रताड़ना का परिणाम बताया। कहा कि उसकी बेटी साधना की शादी 2006 में हुई थी। तभी से उसे परेशान किया जा रहा था।
घटना से गांव में मातम का माहौल है। घटनास्थल साबली पट्टी में पड़ता है, जिसकी जांच राजस्व उपनिरीक्षक सुभाष लिंगवाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी कोई तहरीर नहीं मिली है, लेकिन प्रथम दृष्टया यह आग लगाकर खुदकुशी का मामला प्रतीत हो रहा है।
मृतका की मां विलोचन देवी ने बताया कि शादी के बाद से ही लड़के वालों का व्यवहार उनकी बेटी के प्रति खराब था। सास और पति अक्सर उससे मारपीट किया करते थे।
मृतका की नौ साल की बेटी को सास उसकी मां के पास नहीं जाने देती थी। दो साल पहले साधना के पति और परिजनों ने उनसे लिखित में मारपीट न करने और सही ढंग से लालन-पालन की बात कही थी।