हल्की बारिश से तहस-नहस हो सकता है आधा उत्तराखंड!
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बीते साल की आपदा से आहत उत्तराखंड को पूरी तरह निजात नहीं मिली कि एक बार फिर मानसून धमक गया।
इस साल कमजोर मानसून के बावजूद प्रदेश में दुर्गम इलाकों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पहाड़ों की जिंदगी मामूली बारिश में ही और दुश्वार होने की आशंका है।
आपदा को लेकर की गई तैयारियों की असलियत भी जब-तब उजागर होती रही है। बाढ़ नियंत्रण के काम अधूरे हैं। जो रफ्तार है उससे तय है कि ये शायद मानसून के बाद ही पूरे हो पाएंगे।
कमजोर मानसून लाएगा बड़ी परेशानी
हालांकि मुख्य सचिव सुभाष कुमार का कहना है कि मानसून के दौरान भी जहां संभव होगा काम जारी रहेगा। पिछले कुछ दिनों के हालात बता रहे हैं कि सबसे बुरी हालत सड़कों की है।
दूसरी ओर, कमजोर मानसून पहाड़ की खेती के लिए भी संकट खड़ा कर सकता है। पर्वतीय जिलों में करीब 84 प्रतिशत खेती बरसात पर ही निर्भर है।
तैयारियों का आलम यह है कि मानसून की पहली बरसात में ही प्रदेश में पहाड़ पर रास्ते बंद होने की जानकारियां मिल रही हैं। आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के मुताबिक लामबगड़ के पास बंद हुआ बदरीनाथ हाईवे फिलहाल खोल दिया गया है।
लेकिन बरसात जारी रही तो यह शायद ही खुला रह पाए। दूसरी वजह यह भी है कि लामबगड़ में स्लोप स्टेबलाइजेशन नहीं किया गया।
आधे-अधूरे काम से और बिगड़ सकते हैं हालात
सड़क सहित लामबग का पूरा बाजार अलकनंदा नदी में जून 2013 की आपदा के दौरान आए मलबे में ही बना दिया गया। यही हाल केदारनाथ रूट पर विजयनगर का है।
यहां नदी तल से हालांकि सड़क को थोड़ा ऊपर उठाया गया है पर करीब आधा किमी सड़क मिट्टी के पहाड़ के नीचे है। यहां सड़क का अलाइनमेंट नहीं बदला गया।
उधर गुप्तकाशी से कुछ पहले सेमी गांव के पास भी सड़क का यही हाल है। हालांकि यहां सड़क पूरी ब्लैक टॉप कर दी गई है। दूसरी ओर बाढ़ नियंत्रण के काम कहीं पूरे नहीं हो पाए हैं।
शासन के मुताबिक करीब 56 करोड़ रुपए के काम अभी चल रहे हैं। इन कामों को बरसात में भी जारी रखने को कहा गया है। वहीं लोगों का कहना है कि आधे-अधूरे काम से हालात और बिगड़ सकते हैं।
विस्थापन की सूची में शामिल होंगे छूटे गांव भी : इंदिरा
आपदा प्रभावित क्षेत्रों के जो गांव किन्हीं कारणों से विस्थापन की सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी सूची में शामिल किया जाएगा। यह कहना है कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश का।
मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को इसके लिए निर्देशित कर दिया गया है। कहा कि केदारनाथ में मंदाकिनी नदी का अपने पुराने प्राकृतिक रास्ते से बहना बड़ी उपलब्धि है।
‘अमर उजाला’ ने गुरुवार के अंक में ही खुलासा किया था कि खतरे की जद में आए कुछ गांव विस्थापन की सूची में शामिल नहीं हैं।
इसका संज्ञान वरिष्ठ मंत्री इंदिरा हृदयेश ने लिया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे सभी गांवों को विस्थापन की सूची में शामिल किया जाए। कहा कि नदी किनारे निर्माण को लेकर पहले ही शासनादेश जारी कर दिया गया है।
लेकिन अब अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ऐसे तमाम अतिक्रमण हटाए जाएं जो नदियों के किनारे निर्मित हैं। कहा कि लामबगड़ के पास व्यवस्था दुरुस्त करने की हिदायत मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव को दी गई है।
खासतौर पर सड़कों पर फोकस करने को कहा गया है। गौरतलब है कि बीते मंगलवार रात की बारिश से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लामबगड़ के समीप गदेरे में पानी बढ़ने से 20 मीटर बदरीनाथ हाईवे बह गया था।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मानदेय में इजाफा
इस बार का मानसून जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों के लिए राहत लेकर आया है। मानसून की शुरुआती बौछार के बीच शासन ने गुरुवार को इन अधिकारियों के मानदेय में पांच हजार रुपए का इजाफा कर दिया है।
इसी के साथ जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों में सृजित किए गए पदों को 2015 तक बढ़ाने का आदेश भी जारी किया गया है।
शासनादेश के मुताबिक प्रबंधन परियोजना और क्रि यान्वयन इकाई के लिए सृजित पदों को 31 मार्च 2015 तक बढ़ा दिया गया है।
जून 2013 की आपदा के बाद विश्व बैंक और एडीबी की सहायता से चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ये इकाइयां सृजित की गईं थी। जनवरी, 2014 में इन पदों के सृजन का आदेश जारी किया गया था।
हालांकि शासन ने इन पदों के लिए होने वाले सभीखर्च परियोजना से ही पूरे किए जाने की शर्त को जारी रखा है। गुरुवार को ही आपदा प्रबंधन से जुड़े कर्मियों के वेतन की दूसरी किस्त भी जारी करने का आदेश कर दिया गया।