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आईएएस स्टिंग केस में फंसे उमेश कुमार के खिलाफ एक और वारंट, वाई श्रेणी की सुरक्षा हटाने की तैयारी 

Wed, 31 Oct 2018 08:38 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 31 Oct 2018 08:38 AM IST
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Warrant issued to ias sting case accused umesh kumar security may remove 
उमेश कुमार

स्टिंग प्रकरण में जेल में बंद निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ पुलिस ने ग्यारह साल पुराने धोखाधड़ी के मुकदमे में एक और वारंट प्राप्त कर लिया है। जमानत पर सुनवाई के दौरान बुधवार को पुलिस इस वारंट को दाखिल कर रिमांड लेेगी। इस मुकदमे के ट्रायल पर दस साल से हाईकोर्ट का स्टे चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश का हवाला देकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

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सरकार की नजरें बदलते ही पुलिस स्टिंग प्रकरण में जेल में बंद निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा के पुराने मामलों को खंगालने में जुटी है। मंगलवार को उमेश पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए एक और मुकदमा मिल गया।
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सूत्राें के मुताबिक एक जमीन के मामले में मनोरंजनी शर्मा की तरफ से 2007 में रायपुर थाने में उमेश शर्मा आदि के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
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वाई श्रेणी की सुरक्षा हटाने की तैयारी 

2010 में इस मुकदमे के ट्रायल पर हाईकोर्ट से स्थगनादेश मिल गया था, तब से यह मुकदमा सुनवाई पर नहीं आया था। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में अभियोजन अधिकारियों के साथ मंथन किया था।

इसी बीच स्थगनादेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में दिए आदेश का हवाला देकर अभियोजन अधिकारियों ने मंगलवार को कोर्ट में पैरोकारी की। आदेश के अनुपालन में पुलिस ने धोखाधड़ी के मुकदमे के ट्रायल पर आठ साल से चल रहे स्टे को निरस्त कराते हुए कोर्ट से वारंट प्राप्त कर लिया है। 

आरोपी उमेश कुमार शर्मा की वाई श्रेणी सिक्योरिटी हटाने की तैयारियां भी शुरू हो गई है। उत्तराखंड पुलिस जल्द ही गृह मंत्रालय में इस संबंध में सिफारिश कर सकती है। इसके लिए पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि पुलिस के उच्चाधिकारी इस संबंध में कोई अधिकारिक बयान नहीं दे रहे हैं। 


उमेश कुमार शर्मा ने अक्टूबर 2015 में अपनी जान को खतरा बताते हुए केंद्र सरकार से सिक्योरिटी की मांग की थी। इस पर उत्तर प्रदेश पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर उमेश को वाई श्रेणी की सिक्योरिटी दी गई थी। तब से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 12 जवान और कमांडो उमेश की सुरक्षा में तैनात हैं। बताया जा रहा है कि जिस दिन उमेश की गिरफ्तारी हुई थी, तब भी सिक्योरिटी में तैनात जवानों से पुलिस की नोक-झोंक हुई थी। इस दौरान उनके उच्चाधिकारियों को वारंट की कॉपी दिखाई गई। उसके बाद ही पुलिस उमेश तक पहुंच पाई थी। 

सीआईएसएफ के 12 जवान और कंमाडो करते हैं सुरक्षा

सोमवार को उमेश की पेशी के दौरान भी सिक्योरिटी कोर्ट परिसर के बाहर ही रही। मंगलवार को भी सिक्योरिटी में तैनात जवान परिसर के बाहर ही मौजूद रहे। पुलिस के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब चूंकि उमेश जेल में है तो इस सिक्योरिटी का मतलब ही नहीं है। साथ ही खुफिया रिपोर्ट यह भी कहती है कि उमेश को कोई धमकी या किसी तरह से जान का खतरा है ही नहीं।

 

लिहाजा उसने यह सिक्योरिटी भी सरकार को गुमराह कर अपने रुतबे के आधार पर हासिल की थी। ऐसे में अब पुलिस की ओर से गृह मंत्रालय से इस सिक्योरिटी को वापस लिए जाने की सिफारिश की जा रही है। एक आला अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में सारी तैयारियां हो चुकी हैं, आगे निर्णय गृह मंत्रालय को लेना है।   

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