फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   vyas cave in bageshwar

जान का रिस्क लेकर खोले इस रहस्यमयी गुफा के राज

Fri, 28 Feb 2014 09:22 AM IST
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, कपकोट
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, कपकोट Updated Fri, 28 Feb 2014 09:22 AM IST
विज्ञापन
vyas cave in bageshwar

अगर वह हिम्मत नहीं दिखाता तो कपकोट स्थित नैकाना तोक के गांव में स्थित व्यास गुफा के भीतर का रहस्य, रहस्य ही रह जाता।

विज्ञापन


पढ़ें, छेड़छाड़ प्रकरणः ऐसे हुई थी हरक की युवती से मुलाकात

इस गुफा के भीतर जाकर भनार निवासी युवक महिपाल कोरंगा ने इसके रहस्य खोलने में कामयाबी पाई है। कोई अनिष्ट न हो जाए इस आशंका से अब तक कोई गुफा के भीतर जाने का साहस नहीं कर पाया था।

विज्ञापन

पाताल भुवनेश्वर की तरह ही है यह गुफा

vyas cave in bageshwar

200 मीटर लंबी यह गुफा गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) स्थित पाताल भुवनेश्वर की तरह ही है।

पढ़ें, पंचायत में पद चाहिए तो मायके जाना होगा

गुफा के अंदर आराम से टहला जा सकता है। इसकी चौड़ाई डेढ़ मीटर से भी अधिक है, जबकि प्रवेश द्वार की ऊंचाई छह फीट और गुफा के अंदर की ऊंचाई 15 फीट है।

पढ़ें, नागफनी, उत्तराखंड को बना सकती है धनी

गुफा की दीवारों में शिवलिंग, गणेश, नाग, गदा समेत कई आकृतियां उभरी हैं। भराड़ी-शामा मार्ग पर 22 किमी के बाद खड़लेख भनार मार्ग कटता है। मार्ग के एक किमी दूर खड़लेख बैंड से कुछ दूरी पर नैकाना तोक है।

पढ़ें, 4 मई को खोले जाएंगे केदारनाथ मंदिर के कपाट

कहा जाता है कि आदिकाल में भगवान श्री 1008 मूल नारायण के दो पुत्र नौलिंग और बंज्यैण देवता अध्ययन के लिए काशी गए थे। वापस आकर बंज्यैण देवता ने इस गुफा के भीतर कुछ समय तक तपस्या की थी।

डर से कोई नहीं जाता था वहां

vyas cave in bageshwar

ग्रामीण इस गुफा को व्यास गुफा कहते हैं। लोगों में यह भ्रांति थी कि इस गुफा में अगर कोई जाएगा तो उसका अनिष्ट हो जाएगा। इस डर से कोई वहां नहीं जाता था।

पढ़ें, पंचायत में पद चाहिए तो मायके जाना होगा

बुजुर्गों से गुफा के बारे में कई बार सुन चुके भनार गांव के महिपाल कोरंगा (35) पुत्र नैन सिंह कोरंगा ने मंगलवार को अपने साथियों गोविंद सिंह, दान सिंह, लक्ष्मण सिंह कोरंगा और प्रवीण राम के साथ वहां जाकर गुफा का रहस्य जानने का फैसला किया।

पढ़ें, नागफनी, उत्तराखंड को बना सकती है धनी

कोरंगा ब्रह्मलीन बंगाली साधु देवाशीष महाराज के शिष्य भी हैं। बताते हैं कि इससे पहले भी उन्होंने कई प्रयास किए, लेकिन गुफा के भीतर नहीं जा सके। बुधवार को वहां पहुंचकर उन्होंने गुफा के बाहर फैली मिट्टी और कंटीली झाड़ियों की सफाई की।

पढ़ें, 4 मई को खोले जाएंगे केदारनाथ मंदिर के कपाट

करीब पांच घंटे तक खुदाई करने के बाद उन्हें अंदर प्रवेश करने में सफलता मिल गईऱ। उन्होंने बताया कि गुफा करीब 200 मीटर लंबी है।

विज्ञापन

अंदर से निकल सकता है पानी

vyas cave in bageshwar

गुरुवार को लौटे कोरंगा ने बताया कि गुफा की तलहटी और अंतिम छोर में मिट्टी भरी हुई है। सफाई के बाद गुफा को पूरी तरह खोला जा सकता है और इसके अंदर से पानी भी निकल सकता है।

गुफा का शीघ्र मौका मुआयना करेंगे : एसडीएम
कपकोट के एसडीएम केएस टोलिया ने बताया कि भनार गांव में गुफा मिलने की सूचना अभी उन्हें नहीं मिली है।

पढ़ें, छेड़छाड़ प्रकरणः ऐसे हुई थी हरक की युवती से मुलाकात

गुफा का शीघ्र निरीक्षण किया जाएगा। जिला प्रशासन के माध्यम से पुरातत्व विभाग की अन्वेषण टीम को मौके पर भेजा जाएगा।

गुफा के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे : फर्स्वाण
कपकोट विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि वह शीघ्र ही गुफा देखने जाएंगे।

पढ़ें, पंचायत में पद चाहिए तो मायके जाना होगा

गुफा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गुफा क्षेत्र के विकास के लिए योजनाएं तैयार करवाई जाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed