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चुनाव हारे तो हरीश का कोई बहाना नहीं चलेगा : बहुगुणा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 08 Dec 2015 03:20 PM IST
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने राज्य की कांग्रेस सरकार को समय रहते संभलने की हिदायत दी है।
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उन्होंने कहा कि यदि समय से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई तो आने वाले समय मुश्किलों भरा होगा। अभी तक हम गुजरात में लोकायुक्त का गठन नहीं होने को लेकर नरेंद्र मोदी को घेरते थे, अब क्या जवाब देंगे।
कैबिनेट में फेरबदल पर उन्होंने कहा कि केंद्र में होता है, हर राज्य में हो रहा है तो उत्तराखंड में क्यों नहीं? कुछ नए चेहरों को मौका मिलना चाहिए, जिन्होंने पार्टी को सींचा है।
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पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में कई बिंदुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या मजबूरी होगी कि लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो सकी। यूपीए सरकार के जनलोकपाल बिल को ही उनकी सरकार ने राज्य की विधानसभा से पास कराकर लागू कराया था।
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दो साल बीत गए, लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होना सरकार और कांग्रेस दोनों की सत्य निष्ठा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसके पीछे वजह पूछने पर बताया कि कोई सरकार अपने या अपने सिस्टम के ऊपर किसी तरह का अंकुश नहीं चाहती। यदि लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई तो आने वाले समय में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि विस चुनाव दूर नहीं हैं, कांग्रेस के लिए अभी नहीं तो कभी नहीं जैसी स्थिति है। हरीश रावत सक्षम भी हैं और सरकार में किसी का दखल भी नहीं है, इसलिए उनके पास अब कोई ऐसा बहाना नहीं होना चाहिए कि अपनों ने ही नैय्या डुबो दी।
सरकार के प्रदर्शन के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि कामकाज का मूल्यांकन विस चुनाव की मतपेटियों से निकलेगा। उन्होंने कहा कि जब सभी राज्यों और केंद्र में मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो उत्तराखंड में हरीश क्यों डर रहे हैं। राज्य की पूरी कैबिनेट में परिवर्तन होना चाहिए।
बहुगुणा ने कहा कि हरीश रावत को कड़े फैसले लेने होंगे। हर निर्णय के पीछे वोट बैंक की राजनीति ठीक नहीं है। 7वां वेतन आयोग सिर पर है, उत्तराखंड की आर्थिक दशा किसी से छीपी नहीं है। कर्जा लगातार बढ़ रहा है। देश का अकेला राज्य है जहां पर नॉन प्लान का खर्च सबसे ज्यादा है। ऐसे में विकास कैसे होगा?
चुनाव लड़ना प्राथमिकता नहीं मगर...
आगामी विधानसभा चुनाव में खुद के चुनाव लड़ने पर बहुगुणा ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना मेरी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन मैं रणछोड़ भी नहीं हूं। पार्टी जैसा कहेगी, आदेश का पालन होगा।