...तो नहीं होंगे विश्व प्रसिद्ध 'फूलों की घाटी' के दीदार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीते वर्ष की जल प्रलय के बाद इस वर्ष भी फूलों की घाटी के दीवानों को घाटी के दीदार होने में संशय बना हुआ है।
चमोली जिले में स्थिति विश्व धरोहर फूलों की घाटी की यात्रा तैयारियों को लेकर अभी तक जिला प्रशासन द्वारा तैयार कार्य योजना पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
आपदा के बाद फूलों की घाटी पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गई थी लेकिन प्रशासन 11 माह बीत जाने के बाद भी सुध लेने को तैयार नहीं है। अभी तक घाटी को जाने वाले पैदल मार्ग और पुलों का सुधारीकरण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
विश्व धरोहरों में शामिल है फूलों की घाटी
फूलों की घाटी अपने प्राकृतित सौंदर्य और फूलों की विविधता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। इसे यूनेस्को के द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया जा चुका है।
यहां प्रकृति के चितेरे और वनस्पति विज्ञानियों के साथ ही पर्यटकों का भी प्रतिवर्ष जमावड़ा लगता है लेकिन आपदा में रास्ते नष्ट हो जाने के कारण इस बार पहुंचना मुश्किल हो गया है।
फूलों की घाटी को 1982 में राष्ट्रीय उद्दान घोषित किया गया। इसके बावजूद अभी तक प्रशासन ने यहां तक पहुंचने के मार्गों के सुधारीकरण कार्य का जायजा लेने तक की जहमत तक नहीं उठाई है।
आपदा में बह गया घाटी तक पहुंचने का रास्ता
प्रशासन द्वारा वर्तमान तक घाटी के पैदल मार्ग सुधारीकरण और पुलों का निर्माण कार्य शुरू नहीं करवाया गया है।
फूलों की घाटी को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर शीघ्र फोलडिंग ब्रिज लगवाने का कार्य शुरू किया जा रहा है। पुल निर्माण के लिए लोनिवि को निर्देश दिए गए है। शीघ्र घाटी तक पहुंच मार्ग को सुचारु कर दिया जाएगा।
-एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी, चमोली।