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मोदी के गुजरात को पछाड़ देगा उत्तराखंड का यह गांव
रविंद्र थलवाल/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 01 Jan 2014 11:00 AM IST
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भले ही बीते साल में उत्तराखंड को आपदा ने बड़ा धक्का दिया, लेकिन इस सबके बीच प्रदेश में एक गांव ऐसा भी है जो विकास की तुलना में गुजरात को भी पीछे छोड़ने का दम रखता है।
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उद्यमिता के जज्बे की जीता-जागता मिसाल
आपदा की मारी नगरी उत्तरकाशी का एक गांव बार्सू शहरों से भी न्यारा है। बार्सू पहाड़ से पलायन के खिलाफ अड़ने और उद्यमिता के जज्बे का जीता-जागता मिसाल है। गांव के एक भी व्यक्ति ने कभी पलायन नहीं किया।
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उल्टे यहां दूसरे स्थानों के लोग आकर बस रहे हैं। पर्यटन, बागबानी और कृषि पर आधारित आजीविका वाले गांव के हर परिवार की सालाना आमदनी दो से छह लाख रुपए है।
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सीवरेज सिस्टम सुव्यवस्थित
गांव की गलियों में बिछी टाइल्स, स्ट्रीट लाइट से होती जगमग और सीवरेज सिस्टम सुव्यवस्थित शहरों की टक्कर लेते हैं।
बार्सू मखमली घास से लबालब दयारा बुग्याल, गिटारा, डोडीताल का प्रथम पड़ाव है।
हर साल हजारों पर्यटक इन स्थानों को जाने के लिए गांव में ठहरते हैं। गांव के प्रगतिशील किसान जगमोहन रावत बताते हैं वह हर साल कृषि एवं पर्यटन से करीब 12 लाख रुपए तक कमा लेते हैं।
गांव की खासियत एक नजर में
उत्तरकाशी से 47 किमी दूर
समुद्रतल से ऊंचाई 2300 मीटर
6 कॉटेज, होटल जीएमवीएन का गेस्ट हाउस
सुलभ शौचालय और कम्यूनिटी सेंटर
कृषि-पर्यटन ने बदली बार्सू गांव की तकदीर
140 परिवारों वाले बार्सू की आजीविका का मुख्य जरिया कृषि एवं पर्यटन है
गांव में प्रतिवर्ष 50 लाख के आलू व 10 लाख रुपए के राजमा का उत्पादन
साग-सब्जियां और गेंहू का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन
गांव का हर परिवार पर्यटन से जुड़ा