उत्तराखंडः बादल और कोहरे के बाद निकली धूप, 26 जनवरी को ऐसा रहेगा मौसम
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राजधानी देहरादून में शनिवार का दिन ठंडा रहा। शुक्रवार के मुकाबले तापमान में सात डिग्री से ऊपर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल रविवार को भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। राजधानी में शनिवार की सुबह की शुरुआत घने कोहरे से हुई। इसके बाद बादल छा गए। हल्की फुल्की धूप ही खिली। दिन में हल्की ठंडी हवाओं ने तापमान गिरा दिया।
जहां शुक्रवार को दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री था, वहीं शनिवार को पारा 7.1 डिग्री गिरकर 15.9 डिग्री पर आ गया। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि रविवार को सुबह कोहरे के साथ ही दिन में आंशिक बादल आ सकते हैं। प्रदेशभर में भी आंशिक बादल छाए रहने का अनुमान है। हालांकि फिलहाल कहीं भी बारिश या बर्फबारी के आसार नहीं हैं।
उधर, चमोली जिले में बादलाें के बीच धूप के आने-जाने का खेल जारी है। यहां ठंड का प्रकोप जारी रहने के आसार हैं। दोपहर बाद ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की आशंका है। टिहरी जिले के घनसाली के सीमांत गांव गंगी में 15 दिन बाद भी बर्फ नहीं पिघली है। यहां रास्तों-मकानों पर बर्फ जमी है। जानवरों के लिए चारे की समस्या हो रही है। यहां बिजली, पानी और खाद्य की समस्या सामने आ रही है। रुद्रप्रयाग जनपद में सुबह नौ बजे के बाद मौसम सुहावना हो गया। यहां धूप खिली हुई है। देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में सुबह नौ बजे तक घना कोहरा छाया रहा। इस कारण एयरपोर्ट पर कोई फ्लाइट नहीं उतर सकी। नई टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में धूप खिली है।
शारदा का जलस्तर गिरा, सिर्फ एक टरबाइन से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ
मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार मैदानी इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा भी छाया रह सकता है। प्रदेश के कुछ पहाड़ी जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। वहीं, निचले इलाकों में बादल छाये रहेंगे। मौसम विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिर सकती है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी और कड़ाके की सर्दी का असर शारदा नदी पर पड़ रहा है। पानी जमने से नदी में शुक्रवार सुबह सिर्फ 4,425 क्यूसेक पानी था। इस कारण खटीमा स्थित लोहियाहेड पावर हाउस की तीन में से मात्र एक ही टरबाइन चली और मात्र 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सका।
लोहियाहेड पावर हाउस के डीजीएम महकार सिंह ने बताया कि पावर हाउस की तीनों टरबाइनों को पूरी क्षमता 10,500 क्यूसेक पानी मिलने पर यहां 45 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन होता है। शुक्रवार को सिर्फ टरबाइन संख्या एक के ही चक्के धूम पा पाए और मात्र 15 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ। उन्होंने फरवरी मध्य के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई।