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उत्तराखंड का ऊंची सोच वाला ऊंचावाहन गांव, यहां हर घर के बाहर शौचालय और बाथरूम

Mon, 10 Jun 2019 10:46 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal हेम कांडपाल, अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा)
हेम कांडपाल, अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 10 Jun 2019 10:46 AM IST
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शौचालय - फोटो : प्रतीकात्मक

मासी से छह किलोमीटर की दूरी पर बसे ऊंचावाहन गांव की सुंदरता और एक परिवार की तरह मेलजोल से रहने वाले ग्रामीणों का आत्मीय व्यवहार बरबस ही खींच लेता है। गांव का विकास योजनाबद्ध ढंग से हो रहा है। गांव में हर घर के बाहर शौचालय और बाथरूम बनाए गए हैं तो पानी के हर स्टैंड पोस्ट के निकट सोलर लाइट लगाई गई है।

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गांव में सामुदायिक भवन के साथ ही पांच शौचालय बनाए गए हैं। यह सब इस गांव के कर्मठ प्रधान शंकर सिंह बिष्ट की मेहनत से संभव हो पाया है गांव के लोग कहते हैं कि प्रदेश में हमारे प्रधान जैसा कोई नहीं है। प्रधान शंकर सिंह का कहना है कि सब ठीक रहा तो पूरे गांव के हर घर में एक ही तरह का कलर किया जाएगा। 

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चौखुटिया से 13 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मासी से छह किलोमीटर की दूरी पर बसे ऊंचावाहन गांव की छटा देखते ही बनती है। गांव से पाली पछाऊं से लेकर मासी और जौरासी से जुड़े दर्जनों गांवों के एक साथ दर्शन होते हैं।

गांव की जनसंख्या करीब तीन सौ है, कुल 110 परिवार हैं, जिनमें करीब 65 परिवार गांव में रहते हैं। जबकि 45 परिवार पलायन कर गए हैं। प्रधान शंकर सिंह बिष्ट का कहना है कि पहले सड़क नहीं थी अब सड़क बन गई है। उनका पहला काम पलायन कर गए परिवारों को वापस लाकर अपना मिट्टी से जोड़ना है। उनका कहना है कि पलायन कर बाहर बस गए परिवार के सदस्य भी साल में एक दो बार गांव जरूर आते हैं। 

इस गांव के अधिकतर घर एक दूसरे से सटे हैं। लोग आपस में मेल-मिलाप से रहते हैं।  शादी या कोई शुभ कार्य में कार्ड भेजने के बजाय गांव में आवाज लगाकर सबको आमंत्रित किया जाता है।

प्रधान खुद करते हैं छूटे मकानों में रंग रोगन

ऊंचावाहन के जो लोग पलायन कर बाहर चले गए हैं उनके मकानों का रखरखाव भी गांव के लोग करते रहते हैं। यही नहीं दीपावली आदि के मौके पर ग्राम प्रधान शंकर सिंह बिष्ट अपने जेब से खर्च कर स्वयं ही उन मकानों पर रंग रोगन करते हैं। 

गांव के मंदिर में दिवंगतों के नाम के पत्थर
गांव के मंदिर में दिवंगत लोगों की याद में पत्थर रखे गए हैं जिनमें संबंधित व्यक्ति का जन्म और मृत्यु का वर्ष लिखा गया है। गांव के रास्तों के निर्माण में भी गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है जबकि नालियों की निकासी की कार्य योजना भी बनाई जा रही है। 

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थकुली उडियार बनेगा पर्यटन केंद्र

गांव के थकुली उडियार नामक स्थान को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास भी शुरू हो गया है। इसके लिए कुछ धनराशि भी मिली है। इस स्थान पर विशाल पत्थरों के बीच गुफा है जिसके अंदर जाकर  हाथ से थपकी मारने पर थाली बजने सी आवाज सुनाई देती है इसीलिए इस स्थान को थकुली उडियार कहा जाता है। गांव के लोग गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर इसकी चोटी पर तिरंगा फहराते हैं। 

संग्रहालय भी बनेगा
प्रधान शंकर बिष्ट द्वारा पहाड़ में पुराने समय में उपयोग में लाए जाने वाले सामान का संग्रह भी किया गया है जिसमें सनेसी, लंफू, लालटेन, टेबललैंप, सनैसी, पेट्रोमैक्स, ठेकी, पई, कंडिया आदि तमाम चीजें हैं। भविष्य में गांव में एक संग्रहालय बनाने की भी योजना है।

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