उत्तराखंड: पुरसाड़ी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो कैदी परिसर का ताला तोड़कर फरार
- जेल परिसर में साफ-सफाई के दौरान बैरक से बाहर लाए गए थे
- सीमा पर पुलिस की चौकसी बढ़ाई, एक सजायाफ्ता और दूसरा विचाराधीन है कैदी
- लापरवाही बरतने पर जेल प्रशासन के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा : एसपी
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उत्तराखंड के चमोली जिले के पुरसाड़ी में स्थित जिला कारागार से मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी सहित एक अन्य विचाराधीन कैदी जेल के गेट का ताला तोड़कर फरार हो गए। कैदियों के फरार होने की सूचना मिलते ही जिले की सीमाओं पर पुलिस ने चेकिंग बढ़ा दी है।
पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने जेल परिसर का निरीक्षण कर पुलिस थानों को फरार कैदियों पर नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने और कैदियों के फरार होने पर जेल प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
जेलर प्रमोद पांडे ने बताया कि मंगलवार को सुबह दस बजे जेल परिसर की सफाई के दौरान बंदियों को बाहर लाया गया था। इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर साढ़े दस बजे पोक्सो के तहत मार्च 2018 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा चमोली जिले के रांगतोली गांव निवासी नवीन चंद्र और आपराधिक मामलों में दोषी दीपक राणा, निवासी कलहरी थाना, सुरखेत, नेपाल, हाल निवास चुन्नी बैंड, ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग) जेल परिसर के गेट का ताला तोड़कर फरार हो गए।
उन्होंने बताया कि घटना के दौरान वे गोपेश्वर में किसी कार्य से गए थे। तत्काल इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई। एसपी यशवंत सिंह चौहान जेल में पहुंचे और उन्होंने जेल का निरीक्षण किया।
पहले विश्वास जीता फिर हुआ फरार
एसपी ने बताया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहा कैदी नवीन जेल कर्मचारियों के साथ कार्यालय में सहयोग करता था। उसने पहले जेल प्रशासन का विश्वास जीता और अब मौका पाकर फरार हो गया है। जेल में मौजूदा समय में 90 बंदी हैं, जिनमें से छह कैदी कोरोना के कारण क्वारंटीन में हैं। देहरादून में हत्या के मामले में कैद देहरादून का जितेंद्र उर्फ जित्ती भी डेढ़ साल से यहां कैद हैं।
पुलिस को तीन घंटे देरी से सूचना
पुरसाड़ी जेल से कैदियों के फरार होने की सूचना पुलिस को करीब तीन घंटे देरी से मिली। यह जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। सुबह करीब साढ़े दस बजे कैदियों के फरार होने का मामला सामने आया, लेकिन पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान को इसकी सूचना दोपहर में करीब डेढ़ बजे दी गई। तीन घंटे बाद जिले की सीमाओं पर पुलिस थानों को अलर्ट किया गया।
एसपी यशवंत सिंह चौहान का कहना है कि यह जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। जबकि जेलर प्रमोद पांडे का कहना है कि वे घटना के दौरान जेल में नहीं थे। सूचना मिलने पर तत्काल आईजी के साथ ही अन्य उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और जेल पहुंचकर वस्तुस्थिति पता की। इसी के चलते जिला प्रशासन व पुलिस विभाग को देरी से सूचना दी गई।