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उत्तराखंड में तैनात यूपी निवासी शिक्षक लौटेंगे घर
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 26 Aug 2014 03:46 PM IST
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वर्षों से उत्तराखंड के स्कूलों में सेवा दे रहे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शिक्षकों का अपनों से मिलने का सपना पूरा हुआ है। 14 साल तक चली लंबी प्रक्रिया के बाद आठ शिक्षकों को यूपी के लिए रिलीव कर दिया गया है।
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14 वर्ष तक लटका रहा यह मामला
इसके बाद ऐसे एक हजार और शिक्षकों के भी घर लौटने की उम्मीद जगी है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हिल कैडर के हजारों शिक्षकों ने यूपी में तैनाती का विकल्प भरा था, लेकिन 14 वर्ष तक यह मामला लटका रहा। ये शिक्षक शासन स्तर पर चक्कर काटते रहे।
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इस बीच कुछ शिक्षक मेडिकल तो कुछ एनओसी हासिल कर यूपी में अपने मूल जनपदों में चले गए। लेकिन अब भी एक हजार से अधिक शिक्षक उत्तराखंड में कार्यरत हैं।
हाल ही में विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन शशिभूषण लाल सुशील की ओर से उत्तराखंड के प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) को भेजे पत्र में उत्तराखंड में कार्यरत आठ शिक्षकों को दांपत्य नीति के आधार पर यूपी के लिए रिलीव करने की अनुमति दे दी है।
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उत्तराखंड शासन को भेजे पत्र के अनुसार इन शिक्षकों को रिलीव करने की संस्तुति केंद्र सरकार ने की है। सूत्रों का कहना है कि इन शिक्षकों के बाद जल्द ही कई अन्य शिक्षकों के भी यूपी जाने का रास्ता खुल सकता है।
यूपी शासन भी इस पर सहमति जता चुका है। राजकीय शिक्षक संघ के कुमाऊं मंडल संरक्षक सोहन सिंह माजिला कहते हैं कि शिक्षा विभाग को ऐसे मामलों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए।
ये शिक्षक जाएंगे यूपी
नाम - अभी तैनाती
नीलम गर्ग - सहायक अध्यापिका जीजीआईसी टनकपुर
त्रियुगी नाथ सिंह - प्रवक्ता राजकीय इंटर कालेज उत्तरकाशी
रवींद्र सिंह पाल - प्रवक्ता जीआईसी छरबा
अनीता यादव - प्रवक्ता जीजीआईसी सुल्तानपुर ऊधमसिंह नगर
श्वेता मनचंदा - सहायक अध्यापिका जीआईसी सेंधीखाल पौड़ी
रमेश चंद वर्मा - प्रवक्ता जीआईसी देवधार टिहरी गढ़वाल
रमेश चंद्र कठेरिया - प्रवक्ता जीआईसी खिरैरीखाल पौड़ी गढ़वाल
ओंकारनाथ जौहर - सहायक अध्यापक भीताकोट (खाल) अल्मोड़ा
मैं बहुत खुश हूं। कई वर्षों से मूल जनपद यूपी के बांदा जाने के लिए प्रयास कर रहा था। अब यूपी आवंटन के बाद परिवार के साथ रहकर विभाग की सेवा कर सकूंगा। हालांकि, अभी आदेश स्कूल में नहीं पहुंचे हैं।
- रवींद्र सिंह पाल, प्रवक्ता, जीआईसी छरबा देहरादून