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उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला: डीआईएमटी सेलाकुई के चेयरमैन और कोषाध्यक्ष गिरफ्तार

Mon, 21 Jun 2021 12:05 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 21 Jun 2021 12:05 AM IST
सार

आरोप है कि संस्थान को वर्ष 2011-12 और 2012-13  में मिली दो करोड़ रुपयेे से ज्यादा छात्रवृत्ति में से 1. 34 करोड़ रुपये इन्होंने अपने खातों में ट्रांसफर कराए।

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Uttarakhand Scholarship scam: Chairman and treasurer of DIMT Selakui arrested
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने सेलाकुई स्थित देहरादून इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (डीआईएमटी) के चेयरमैन और कोषाध्यक्ष को मेरठ से गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से इन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

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वर्ष 2017 में अमर उजाला ने प्रदेश में 500 करोड़ से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले को उजागर किया था इसके बाद अप्रैल 2018 में शासन ने इस घोटाले की जांच को एक एसआईटी का गठन किया था। एसपी मंजूनाथ टीसी की अध्यक्षता में यह एसआईटी लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में सेलाकुई स्थित डीआईएमटी में भी जांच की जा रही थी। एसपी मंजूनाथ किसी ने बताया कि 2019 में इंस्टीट्यूट के चेयरमैन व अन्य आरोपियों के खिलाफ सहसपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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जांच में पता चला कि वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक संस्थान को कुल 3. 29 करोड़ की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई थी। इसमें से वर्ष 2011-12 और 2012-13 में 1. 34 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति अपने खातों में प्राप्त की। इस संस्थान के चेयरमैन डॉ मनोज कुमार निवासी ग्राम कौल, मवाना मेरठ और कोषाध्यक्ष दीपक कुमार निवासी अशोडा हाउस, लाल कुर्ती मेरठ को रविवार दोपहर गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों को न्यायालय में भी पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। 
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मुफ्त दाखिले के झांसा देकर लिए थे छात्रों से दस्तावेज
जांच में पता चला है कि इन आरोपियों ने छात्रों को मुफ्त में दाखिला देने का झांसा दिया था। इसके बाद कहा था कि संस्थान उन्हें एडमिशन के बारे में फोन पर सूचना दे देगा इस झांसे में आकर सैकड़ों छात्रों ने इन्हें अपने दस्तावेज दे दिए। एससी एसटी के इन छात्रों के प्रवेश दिखाकर यह छात्रवृत्ति डकारी गई। एसआईटी ने जब छात्रों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि आज तक उन्हें इंस्टीट्यूट से कोई कॉल किया संदेश नहीं आया है।

संस्थानों की जांच लगभग पूरी, अब विभागीय अधिकारियों की बारी

छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने अब तक संस्थानों के खिलाफ जांच लगभग पूरी कर ली है। कुल 83 मुकदमों में से एक मुकदमा हरिद्वार और दो देहरादून में लंबित हैं। अब विभिन्न राज्यों के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इनके खिलाफ 63 मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी को कुल 16 इंस्पेक्टर मिल चुके हैं। जल्द ही बड़ी कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं। 

वर्ष 2018 से मामले की जांच करते हुए एसआईटी ने 51 मुकदमे हरिद्वार और 32 देहरादून में दर्ज किए थे। इनमें अब तक सरकारी अधिकारियों समेत कुल 53 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी के मुताबिक अब देहरादून में दो मुकदमे बचे हैं, जिनमें कार्रवाई होनी है। जबकि, हरिद्वार में यह संख्या एक है। अब तक कई अधिकारी और शिक्षण संस्थान के मालिकान गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट भी गए हैं।

एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा आदि राज्यों के 22 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 38 मुकदमे हरिद्वार और 25 मुकदमे देहरादून में दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन नियमानुसार भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी ही कर सकता है। लिहाजा, अब आठ हरिद्वार और आठ इंस्पेक्टर देहरादून में मिल गए हैं। 

शासन से भी ली जाएगी अनुमति
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से भी मंजूरी ली जाएगी। इसके लिए एसआईटी विभिन्न राज्यों के शासन को अपने शासन के माध्यम से संपर्क करेगी। ताकि, आरोपी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। 

करीब 200 करोड़ का है घोटाला
घोटाला जब सामने आया था उस वक्त लगभग 500 करोड़ रुपये के गबन की बात की जा रही थी, लेकिन अभी तक सभी मुकदमों की जांच में यह रकम करीब 200 करोड़ रुपये के आसपास है। हालांकि, एसआईटी ने इसका अभी पूरा आकलन नहीं किया है। यह रकम इससे ज्यादा भी हो सकती है। 

ये है कार्रवाई
कुल मुकदमे संस्थानों के खिलाफ - 51(हरिद्वार) व 32(देहरादून)
गिरफ्तार आरोपी- 48 (शिक्षण संस्थानों के मालिकान) और 05 (सरकारी अधिकारी)
स्टे प्राप्त आरोपी- 94
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमे- 38 (हरिद्वार) व 25(देहरादून)
जांच पूरी- 50 हरिद्वार के और 30 देहरादून के मुकदमे

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