छात्रवृत्ति घोटाला: दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही जारी कर दिए डेढ़ करोड़ के चेक

दीप चंद्र बेलवाल, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 10 Aug 2021 05:01 PM IST

सार

बता दें कि ऊधमसिंह नगर के अलग अलग थानों में बाहरी राज्यों के 60 शैक्षिक संस्थान और 70 से अधिक बिचौलियों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप में केस दर्ज हैं।
घोटाला
घोटाला - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपियों पर दर्ज मुकदमों की विवेचना में अब नया खुलासा हुआ है। जसपुर, बाजपुर और काशीपुर के विद्यार्थियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने से पहले ही समाज कल्याण अधिकारियों ने बिचौलियों के साथ मिलकर डेढ़ करोड़ के चेक जारी कर दिए। इतना ही नहीं, एसआईटी जांच शुरू हुई तो अधिकारियों और बिचौलियों ने बैक डेट में दस्तावेजों को सत्यापित कर बचाव करने का प्रयास किया। 
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ऊधमसिंह नगर के अलग अलग थानों में बाहरी राज्यों के 60 शैक्षिक संस्थान और 70 से अधिक बिचौलियों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप में केस दर्ज हैं। इन शैक्षिक संस्थानों में जिले के तीन हजार विद्यार्थियों का प्रवेश दिखाकर एससी, एसटी और ओबीसी तीनों कैटेगरी में 14 करोड़ रुपये जारी करना दिखाया गया था।


एसआईटी जांच शुरू हुई तो भ्रष्टाचार का खुलासा होना शुरू हो गया था। विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिली नहीं लेकिन उनके नाम पर करोड़ों का गबन हो गया। शैक्षिक संस्थानों पर दर्ज मुकदमों में भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराएं बढ़ाने के बाद जांच सीओ स्तर से शुरू हो गई थी।

जसपुर थाने में दर्ज सहायक समाज कल्याण अधिकारी हरीशनाथ गोस्वामी पर दर्ज मुकदमे की विवेचना में उसकी संलिप्ता सामने आने पर पुलिस दो दिन पहले उसे गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। एसआईटी सूत्रों के अनुसार जसपुर, बाजपुर और काशीपुर के 250 से अधिक विद्यार्थियों के दस्तावेज स्कूलों के नाम से सत्यापित होने के लिए समाज कल्याण विभाग में पहुंचे थे।

जहां दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही अधिकारियों ने बिचौलियों के साथ मिलकर डेढ़ करोड़ के चेक जारी कर दिए। दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करने पर पता चला है कि चेक जारी होने और दस्तावेज सत्यापित होने की तिथि में भारी अंतर है। चेक जारी होने से पहले दस्तावेज का सत्यापन होना जरूरी था। 

इस तरह हुआ था घोटाला 

छात्रवृत्ति पाने के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। जबकि पूर्व में प्रक्रिया अलग थी। बिचौलिए विद्यार्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। जाति, आय व अन्य प्रमाणपत्र बनाकर एसडीएम, तहसीलदार व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर मुहर लगाई जाती थी। इन दस्तावेजों को एकत्र कर बाहरी राज्यों के स्कूलों को दिखाकर समाज कल्याण विभाग में पहुंचाया जाता था। जहां पटल सहायक, सहायक समाज कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी और बिचौलिये एकराय होकर अलग अलग कोर्स के नाम पर छात्रवृत्ति जारी करते थे। दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही छात्रवृत्ति की रकम दे दी जाती थी। 

हरीशनाथ गोस्वामी के मिले बैक डेट के हस्ताक्षर 
दो दिन पहले जेल गए सहायक समाज कल्याण अधिकारी हरीशनाथ गोस्वामी के बैक डेट में हस्ताक्षर पाए गए हैं। हरीशनाथ ने जिस तारीख में विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया। उससे पहले ही विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये के चेक जारी हो गए थे। हरीशनाथ के सहायक समाज कल्याण अधिकारी रहते समय जगमोहन कफोला और अनुराग शंखधर समाज कल्याण अधिकारी थे। संभावना जताई जा रही है कि तीनों की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ होगा। 

छात्रवृत्ति घोटाले में दर्ज मुकदमों की विवेचना में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। विद्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए। समाज कल्याण विभाग के जिन अधिकारियों की लिप्तता घोटाले में सामने आई है उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। घोटालेबाज अन्य अधिकारियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
- ममता बोहरा, एसआईटी प्रभारी
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