उत्तराखंडः बारिश ने मचाया कोहराम, कई घर ध्वस्त, खौफजदा लोगों ने छोड़े घर
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शुक्रवार से जारी बारिश से उत्तराखंड के गढ़वाल में कोहराम मचा हुआ है। गढ़वाल मंडल में कही सड़कों पर पहाड़ से पत्थर गिर रहे हैं तो वहीं इस आपदा से डरे लोगों ने घर छोड़ दिए हैं।
घनसाली (टिहरी) में आपदा प्रभावित कोठियाड़ा गांव के 23 और परिवारों ने लगातार हो रही बारिश और घरों में मलबा घुसने के कारण घर छोड़कर स्कूल परिसर में शरण ली है। अब गांव में अपने घर छोड़ने वाले परिवारों की संख्या 95 हो गई है। प्रशासन की ओर से 72 प्रभावित परिवारों को अस्थायी घर बनाने के लिए टीन दिए हैं, जो नाकाफी हैं।
भिलंगना ब्लाक की पट्टी केमर के कोठियाड़ा, केमरा, सिल्यारा, गनगर आदि गांवों में 28 मई को हुई जलप्रलय से ग्रामीणों के मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे। तब प्रकृति ने सबसे अधिक कहर कोठियाड़ा गांव में बरपा। उस दिन गांव के ऊपर बादल फटने से 72 परिवारों के घर जमींदोज हो गए थे।
तब प्रशासन ने इन परिवारों को गांव के स्कूल और बारात घर में शिफ्ट कर दिया गया था। अन्य लोग अपने घरों के आसपास आए मलबे को हटाकर वहीं रहने लगे थे। अब तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से गांव के ऊपर से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर आने से लोग भयाक्रांत हैं। घरों में मलबा घुसने से 23 परिवारों ने स्कूल में शरण ली है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी और मलबे के कारण उनकी जानमाल को खतरा होने के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। उन्होंने गांव के विस्थापन की मांग की है।
इन परिवारों ने छोड़े घर
संपदा देवी, कमला देवी, धीरेंद्र, लोकेंद्र, धर्मानंद, विजय, कमली, उमा देवी,आनंदी, विनोद, पुष्पा देवी, रैजादेवी, प्रवीन, गीताराम, विजयराम, रमेश प्रसाद आदि।
ग्रामीणों ने वस्तु स्थिति से अवगत कराया है। जांच के लिए पटवारी को भेजा गया है। गांव के 72 लोगों को आर्थिक मदद के तौर पर प्रति परिवार एक लाख 19 सौ रुपये और प्रशासन ने आठ टीन की चादरों के हिसाब से 576 टीन की अतिरिक्त सहायता की है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी, घनसाली
लामबगड़ में चट्टान से छिटक रहे पत्थर, चारधाम यात्रियों को रोका
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दूसरे दिन रविवार को भी लामबगड़ और कंचन गंगा में अवरुद्ध रहा। इसके बावजूद लामबगड़ गांव से करीब आधा किमी पैदल चलकर करीब 27 तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे। लामबगड़ में चट्टान से लगातार पत्थर हाईवे पर छिटक रहे हैं, जिससे पुलिस प्रशासन की ओर से तीर्थयात्रियों को जोशीमठ, पांडुकेश्वर और बदरीनाथ धाम में रोका गया है।
रविवार को भी दिनभर बारिश रहने से सीमा सड़क संगठन के मजदूर हाईवे को नहीं खोल पाए। बाजपुर में भी बदरीनाथ हाईवे बाजपुर में खतरनाक बना हुआ है। यहां हाईवे दलदल में तब्दील हो गया है। चट्टान से पत्थरों के छिटकने का डर बना हुआ है। कौड़िया, बिरही और पीपलकोटी में भी तड़के से ही मलबा आने से हाईवे अवरुद्ध रहा।
यहां बीआरओ ने सुबह दस बजे तक हाईवे को खोल दिया था। बीआरओ के कमांडर कर्नल आर सुब्रमण्यम का कहना है कि लगातार बारिश से हाईवे को खोलने का कार्य प्रभावित हो रहा है। लामबगड़ में चट्टान से लगातार पत्थर छिटक रहे हैं। बारिश थमने के बाद ही यहां हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जा सकता है।
चमोली जिले में भारी बारिश के दौरान गिरा मकान
चमोली जिले में पिछले तीन दिनों से जारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। भूस्खलन से 61 सड़कें अभी भी अवरुद्ध पड़ी हैं। पहाड़ियां दरकने से ग्रामीण क्षेत्रों में कई मकान खतरे की जद में आ गए है। रविवार को मटई गांव के सेवक राम पुरोहित का मकान भारी बारिश के दौरान भरभरा कर गिर गया।
इस दौरान परिवार के सभी सदस्य गोशाला में शरण लिए हुए थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हो पाई है। खाल गांव में भाष्कर बेंजवाल और चंडी बेंजवाल के घर का आंगन क्षतिग्रस्त होने से भवनों को खतरा उत्पन्न हो गया है। पीपलकोटी क्षेत्र के किरुली गांव में ग्रामीण आलम सिंह फर्स्वाण के मकान का आंगन क्षतिग्रस्त हो गया है।
जिले में बंद पड़ी सड़कें
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे
गोपेश्वर-पोखरी
गोपेश्वर-मंडल-ऊखीमठ
नंदप्रयाग-घाट
चमोली-लासी-सरतोली
हेलंग-उर्गम
पीपलकोटी-मठ-बैमरु
मैठाणा-पलेठी
सड़क पर मलबा, यातायात ठप
कोटद्वार/यमकेश्वर पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर मलबा आने से दुगड्डा डिवीजन में पांच सड़कें पूरी तरह से बंद हो गई हैं। यमकेश्वर में लक्ष्मणझूला दुगड्डा-कोटद्वार राज्य राजमार्ग पर खैरखाल और जुलेड़ी गांव के पास आए मलबे से यातायात करीब पांच घंटे ठप रहा। लगातार हो रही बारिश से यमकेश्वर के कई गांवों में भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है।
शनिवार से लगातार हो रही बारिश से सैंधीखाल-फुल्लरसैण चुंडई मोटर मार्ग, पौखाल सिमलना-कण्वाश्रम मोटर मार्ग, पौखाल मांडई मोटर मार्ग, परिंदा-कुश्ख्यत मोटर मार्ग और दुगड्डा-जुआ मोटर मार्ग पर मलबा आ गया। रविवार को इन सड़कों पर आवागमन पूरी तरह बंद रहा। लोक निर्माण विभाग मलबा हटाकर सड़कों को खोलने में जुटा है।
यमकेश्वर प्रखंड में लक्ष्मणझूला कांडी-दुगड्डा राजमार्ग पर खैरखाल और जुलेडी गांव के पास मलबा आ गया। इससे हाईवे लगभग पांच घंटे बाधित रहा। पीडब्लूडी ने जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर इन वाहनों को किसी तरह निकाला। लगातार हो रही बारिश से बढ़ते भूस्खलन के खतरे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी हैं। चारों ओर सड़क बंद होने से लोगों को कई किमी पैदल चलकर अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ा।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश चंद्रा ने बताया कि दुगड्डा डिवीजन में पांच सड़कें बंद हैं। जिन जगहों पर वाहन फंसे थे उनको जेसीबी की मदद से निकाल दिया गया है। इन सड़कों को पूरी तरह से यातायात के लायक बनाने में कम से कम तीन दिन लग सकता है। तेज बारिश की वजह से काम में दिक्कत आ रही है।
पौड़ी में गिरा मकान
पौड़ी में भारी बारिश के कारण पाबौ ब्लॉक के घुड़दौड़स्यू पट्टी के ग्राम पीपली में शनिवार रात एक ग्रामीण का मकान गिर गया। इसमें एक युवक जख्मी हो गया। उसके सिर में चोट लगने की वजह से आठ टांके आए हैं। मकान में रखा सभी सामान मलबे में दब गया है।
पीपली गांव में शनिवार रात करीब पौने नौ बजे शिवानंद चमोली की पत्नी आमा देवी रसोई में खाना बना रही थीं। बकौल आमा देवी उन्होंने कोई चीज की गिरने की आवाज सुनी तो उन्होंने परिजनों से बाहर चलने को कहा। घर से बाहर निकले तो मकान को गिरते देखकर होश उड़ गए। उन्होंने बताया कि उनके पति, बेटी प्रतिमा, छोटा बेटा प्रियांशु और वह तो बाहर सुरक्षित निकल गए लेकिन बड़ा बेटा परवेश (20) अलग कमरे में था।
दरवाजे से जाते वक्त वह मलबे में आधा दब गया। परवेश को जैसे-तैसे बाहर खींचा। इस बीच उसके सिर में चोट आ गई। उन्होंने रात में अपने जेठ के घर में शरण ली। परवेश को तुरंत उपचार दिया गया। उसके सिर पर आठ टांके आए हैं। अब तक प्रशासन की ओर से उनके यहां कोई नहीं पहुंचा है।
श्रीनगर के सिंगोरी गांव में भूस्खलन से एक मकान दबा
भारी बारिश से श्रीनगर के सिंगोरी गांव में भूस्खलन से एक मकान दब गया। प्रभावित बुद्धि सिंह के अनुसार मलबे से उनकी छह बकरियां दब गई हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से परिवार को अन्यत्र शिफ्ट करा दिया है।
राजस्व पुलिस उप निरीक्षक रविंद्र ने बताया कि लगातार भूस्खलन से मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही है। वहीं श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील से फरासू के निकट बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे लगातार भूकटाव हो रहा है। ट्रीटमेंट योजना बनाने के लिए जिलाधिकारी ने लोनिवि निर्माण खंड, एनएच खंड और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंताओं की कमेटी गठित की है।
फरासू में भी कटाव होने से मंदिर और एक भवन क्षतिग्रस्त हुआ है। रविवार को एसडीएम रजा अब्बास और तहसीलदार वेदपाल सिंह की मौजूदगी में हुनमान मंदिर की मूर्ति को शिफ्ट करने की कार्रवाई की गई। वहीं, भारी बारिश से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चमधार और फरासू के बीच मलबा आने का सिलसिला जारी है। यहां लोनिवि एनएच खंड ने मलबा हटाने के लिए दोनों ओर से जेसीबी लगाई हुई हैं।
इधर, कीर्तिनगर तहसील के मढ़ी गांव में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर के किनारे भूधंसाव जारी है। खतरे को देखते हुए टिहरी के जिलाधिकारी के आदेश पर परियोजना संचालन कर रही कंपनी ने नहर का जल स्तर एक मीटर कम कर दिया।
कोटद्वार में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने जहां गर्मी और उमस में राहत दी है वहीं, नदी नाले उफान पर आ गए हैं। तटवर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रास्टनगंज में हो रही है। बाढ़ के खतरे के भय से यहां के लोगों ने शनिवार की रात जागकर गुजारी।
रविवार को सुबह से ही मालन, सुखरौ नदी के अलावा गिवईं स्रोत उफान पर रहा। इसके कारण नदी के तटवर्ती क्षेत्र सिमलचौड़ और ग्रास्टनगंज में लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने बाढ़ के खतरे को देखते हुए रविवार रात को जागकर गुजारी। स्थानीय नागरिक राजन सिंह, भरत सिंह ने सिंचाई विभाग पर बाढ़ सुरक्षा दीवार नहीं बनाने का आरोप लगाया। कहा कि पानी के तेज बहाव की आवाज सुनकर रात भर जागकर गुजारी है।