उत्तराखंड से दूर हो रही है कैबिनेट बर्थ
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विस्तार की चर्चाओं के बीच केंद्रीय कैबिनेट की बर्थ उत्तराखंड से दूर होती दिख रही है। क्योंकि पौड़ी सांसद बीसी खंडूड़ी व हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के बाद अब नैनीताल से सांसद व केंद्रीय मंत्री केलिए प्रबल दावेदार भगत सिंह कोश्यारी को भी संसद की याचिका समिति का चेयरमैन नियुक्त किया है।
केंद्र के इस संकेत के बाद अब राज्य भाजपा में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य से भाजपा के पांचों सांसद जीते तो दो के मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन जैसे ही केंद्रीय मंत्रिमडंल का स्ट्रक्चर सामने आया तो एक के ही मंत्री बनने की कयासबाजी शुरू हो गई।
इनमें बीसी खंडूड़ी को उम्र के लिहाज से रेस से बाहर मान लिया गया और निशंक व भगतदा में से किसी एक के मंत्री बनने की उम्मीद बढ़ गई।
कोई मंत्री नहीं बन सकता
केंद्र ने जब जनरल खंडूड़ी को रक्षा मामलो की स्थाई समिति और निशंक को आश्वासन समिति का अध्यक्ष बनाया तो माना जाने लगा कि अब भगत सिंह कोश्यारी ही मंत्रिमंडल में शामिल होंगे। कुछ दिन तक चर्चा होती रही लेकिन चार दिन पहले भगतदा को भी संसद की याचिका समिति का अध्यक्ष नामित कर दिया।
इसके बाद भगतदा समर्थकों में भी मायूसी छा गई। तीनों बड़े नेताओं को समितियों के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य ही हिस्सेदारी पर संकट दिख रहा है।
हालांकि ऐसा नहीं है कि समिति के अध्यक्ष बनने के बाद कोई मंत्री नहीं बन सकता। यह प्रधानमंत्री की इच्छा पर निर्भर करता है, यदि वह किसी को मंत्रिमंडल में लेना चाहते है तो समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिलवा सकते है। लेकिन फिलहाल चिंता केंद्रीय मंत्रिमडंल में प्रदेश के प्रतिनिधित्व की है। वैसे भी टिहरी व अल्मोड़ा के सांसदों को अब उम्मीद जगी है कि हो सकता है इन परिस्थितियों में उनका नंबर लग जाए।