मेहनत लाई रंग: नौकरी छोड़ खेती को बनाया स्वरोजगार का जरिया...बिना मिट्टी और पानी के उगा दिया केसर
नीरज (35) ने वर्ष 2022 में उद्यान विभाग की मदद से रौली गांव में 25 नाली भूमि पर उद्यानीकरण शुरू किया था। उन्होंने यहां लिलियम फूल के उत्पादन से कारोबार शुरू किया।
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दो साल पहले दिल्ली में लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ रौली गांव के नीरज भट्ट ने खेती को स्वरोजगार का जरिया बनाया और आज वह तीन तरह की खेती कर रहे हैं। कीवी फल और लिलियम फूल की खेती में बेहतर कमाई करने के बाद नीरज ने केसर की खेती शुरू की है। अपने घर की छत पर ही नीरज ने बिना मिट्टी और पानी के कोल्ड स्टोर में केसर का उत्पादन किया है। शुरुआती चार माह में केसर उत्पादन के परिणाम भी सुखद आए हैं। नीरज ने यूट्यूब से केसर की खेती का हुनर सीखा। उन्होंने इसका बीज कश्मीर से मंगवाया है।
नीरज (35) ने वर्ष 2022 में उद्यान विभाग की मदद से रौली गांव में 25 नाली भूमि पर उद्यानीकरण शुरू किया था। उन्होंने यहां लिलियम फूल के उत्पादन से कारोबार शुरू किया। इन दो सालों में वे लिलियम की 30 हजार कली बेचकर करीब पांच लाख रुपये कमा चुके हैं। इसके साथ ही वे कीवी का उत्पादन भी कर रहे हैं। उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाते हुए ऐरोपोनिक्स विधि से केसर का उत्पादन शुरू किया।
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इसी वर्ष अगस्त माह में करीब 13 लाख रुपये की लागत से अपने घर की छत पर 245 स्क्वायर फीट का वाटरप्रुफ कमरा तैयार किया। इन चार महीनों में फूलों से केसर भी होने लगा है। नीरज बताते हैं कि उन्होंने यूट्यूब से केसर उत्पादन की जानकारी ली और करीब तीन दिन तक चंडीगढ़ में इसकी खेती का प्रशिक्षण लिया।
उसके बाद कश्मीर से करीब 100 किलोग्राम केसर का बीज खरीदा। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग से इसके लिए मदद मांगी, लेकिन विभाग ने असमर्थता जताई, जिसके बाद बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर कारोबार शुरू किया। इस केसर को प्रमाणित करने के बाद बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि नीरज ने बीटेक और एमबीए की पढ़ाई की है। उनके पिता यदुनंदन भट्ट का अपना क्लीनिक है जबकि माता शिक्षिका हैं। नीरज आज युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। संवाद
केसर उत्पादन की विधि
नीरज ने बताया कि ऐरोपोनिक्स विधि से केसर के बीज लकड़ी की ट्रे में रखे जाते हैं। इसके लिए कमरे का तापमान 21 से 5 डिग्री तक होना चाहिए। रात को कमरे का तापमान 5 डिग्री तक जरूरी होता है। एक फसल चार माह में तैयार होने लगती है और केसर फूल से प्राप्त किया जाता है।