सर्दियों की ‘शहनाइयों’ पर छाया ग्रहों का साया, इस बार विवाहों के शुभ मुहूर्त बहुत कम
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पहले कोरोना गर्मियों में शादियों के तमाम शुभ मुहूर्त लील गया, अब सर्दियों के विवाह के सीजन पर ग्रहों का साया मंडराने लगा है। 25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से चार महीनों का विवाह सीजन शुरू हो रहा है, लेकिन इस बार शुभ मुहूर्त न होने से शहनाइयां बेहद कम ही सुनाई देंगी।
प्राच्य विद्या सोसायटी के निदेशक डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि जब भी देव गुरु बृहस्पति, मकर या सिंह राशि में आते हैं तो उस समय विवाह करना निषेध है। विशेष रूप से यदि गुरु अपनी नीच राशि मकर में हो तो विवाह शुभ नहीं माना जाता है। ग्रहों में गुरु को सबसे शुभ ग्रह कहा गया है। गुरु और शुक्र दोनों ही विवाह के शुभ कारक हैं।
इसमें भी गुरु को समस्त धार्मिक कृत्यों का देवता कहा जाता है। माना जाता है कि विवाह में यदि गुरु शुभ हो तो कन्या हमेशा सुख रहती है, लेकिन जब देव गुरु मकर राशि में आते हैं तो वह अपनी शुभता खो देते हैं।
20 नवंबर से 5 अप्रैल 2021 तक मकर राशि में होंगे गुरु
डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि यदि गुरु नीच राशि मकर में, वक्री, अतिचारी हो तो संन्यास दीक्षा, देव यात्रा, व्रत, नियम, यज्ञ, वेद दीक्षा, विवाह, गंगा स्नान, देव प्रतिष्ठा आदि कोई भी कार्य नहीं होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष में गुरु 20 नवंबर से 5 अप्रैल 2021 तक मकर राशि में होंगे।
इसमें भी 13 जनवरी 2021 से 13 फरवरी 2021 तक गुरु अतिचारी होंगे। उत्तर भारत में देव उत्थान एकादशी के बाद विवाह प्रारंभ हो जाते हैं, लेकिन इस बार गुरु के परम नीच अंशों में होने के कारण शुभ विवाह नहीं होंगे। ऐसे में सालभर से कोरोना काल के कम होने पर नवंबर या दिसंबर में विवाह रचाने का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगेगी।