विलुप्त होता जा रहा सलधार का गर्म कुंड, बहुत कम रह गया पानी, लोग पोटली में डालकर उबालते थे चावल
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उत्तराखंड के जोशीमठ-मलारी हाईवे पर सलधार के पास उबलते पानी का कुंड अब विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है। इस समय यहां पर बहुत कम गर्म पानी रह गया है। यदि इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाले समय में यह सिर्फ किस्से कहानियों में ही रह जाएगा।
जोशीमठ से मलारी हाईवे पर 18 किमी की दूरी पर सलधार में प्रकृति की यह सुंदर देन है। यहां का पानी सर्दी और गर्मी दोनों मौसम में गर्म रहता है। इसे देखने के लिए अक्सर लोग यहां आते हैं।
यहां आने वाले कई लोग और मजदूर चावल की पोटली डाल देते थे और कुछ ही देर में चावल बनकर तैयार हो जाता था। कई लोग इसमें अंडे भी डालकर उबालते थे। अब यह कुंड विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है। गर्म पानी बहुत कम दिखाई दे रहा है।
शासन-प्रशासन को नहीं चिंता
इस तरह के प्राकृतिक दृश्य एक ओर पर्यटकों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र होते हैं। वहीं यह हमारी प्राकृतिक धरोहर भी हैं, लेकिन इस कुंड के संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन स्तर से कोई पहल नहीं की गई। यदि अब भी इसके संरक्षण में देर की गई तो यह सदा के लिए गायब हो जाएगा।
कुंड के पास से मिट्टी ले जाते हैं लोग
इस कुंड के पास पाई जाने वाली मिट्टी काफी मुलायम होती है। इस मिट्टी को चेहरे पर लगाने से कील, मुहासे और दाग साफ हो जाते हैं। इसलिए लोग बड़ी संख्या में यहां से मिट्टी भी ले जाते हैं।
कुंड में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। विभाग इसके संरक्षण के लिए योजना बना रहा है। जल्द ही इस दिशा में काम किया जाएगा।
- धीरेश चंद्र बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क