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Uttarakhand News : जल संकट से निपटने के लिए नदियों, नालों, झरनों व झीलों का डाटा तैयार करने में जुटे वैज्ञानिक

Mon, 18 Jan 2021 01:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 18 Jan 2021 01:06 PM IST
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uttarakhand news :  Scientists preparing data of rivers, drains, springs and lakes to deal with water crisis
मदकिनी नदी में बना तालाब - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के वैज्ञानिकों की टीम जल शक्ति मंत्रालय के निर्देश पर राज्य की सभी नदियों के साथ ही झरनों, झीलों, नालों और खालों समेत सभी जलस्रोतों का सैटेलाइट डाटाबेस तैयार कर रही है। वैज्ञानिकों की टीम सेटेलाइट के जरिए नदियों, झरनों, झीलों के साथ उन तमाम जलस्रोतों को भी चिह्नित कर रही है जिनके बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है। 

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यूसैक वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि नदियों, नालों और झरनों के बारे में पूरी जानकारियां जुटा दी जाती हैं तो उसी के आधार पर भविष्य में जल संकट से निपटने को लेकर नीतियां बनाई जा सकती हैं।
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यूसैक के निदेशक एवं वरिष्ठ अंतरिक्ष विज्ञानी प्रो. एमपीएस बिष्ट ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम भागीरथी, अलकनंदा, शारदा, काली गंगा, केदारगंगा, तिलगाड़, जालंधरी, असीगाड़, भिलंगना, उत्तरगंगा, सरस्वती, धौलीगंगा, ऋषिगंगा, खीरगाड़, धौलीगंगा, भिरहीगंगा, पातालगंगा, मंदाकिनी, पिंडर, कुत्थी, गैरी, सरयू, समेत राज्य की तमाम छोटी-बड़ी नदियों का सैटेलाइट डाटा तैयार कर रही है। नदियों, झरनों, झीलों, नालों का डाटाबेस तैयार करने के बाद इनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
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निदेशक प्रो. बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में जिस तरीके से साल दर साल जल संकट खड़ा हो रहा है उससे निपटने को लेकर राज्य के सभी जलस्रोतों का अधिक से अधिक उपयोग करना होगा। तभी इस संकट से पार पाया जा सकता है।


बताया कि यूसैक के अलावा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अलावा सिंचाई विभाग के अभियंता भी अपने स्तर पर तमाम डाटा तैयार कर रहे हैं। भविष्य में जल शक्ति मंत्रालय या राज्य सरकार की ओर से आयोजित बैठकों में सभी संबंधित विभागों का डाटा साझा किया जाएगा।

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