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Uttarakhand: साहित्य कल्याण कोष बनेगा और बुजुर्ग साहित्यकारों को मिलेगी पेंशन, भाषा मंत्री ने मांगा प्रस्ताव

Tue, 07 Apr 2026 10:57 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 07 Apr 2026 10:57 PM IST
सार

बैठक में निर्देश दिए गए कि गढ़वाल, कुमाऊं व जौनसार बावर क्षेत्र में विभिन्न अवसरों पर होने वाले पौराणिक गायनों का अभिलेखिकरण एवं दस्तावेजीकरण किया जाए।

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Uttarakhand News Sahitya Kalyan Kosh to be established elderly literature to receive pension
भाषा मंत्री खजानदास - फोटो : सूचना विभाग

विस्तार

राज्य में साहित्यकारों के लिए न सिर्फ साहित्य कल्याण कोष बनेगा बल्कि बुुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन भी मिलेगी। भाषा मंत्री खजानदास ने सचिवालय स्थित सभाकक्ष में हुई विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

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भाषा मंत्री ने कहा, प्रदेश के युवा एवं बाल साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। भाषा विभाग के तहत किए जाने वाले कार्यों के लिए विभागीय बजट को बढ़ाया जाना आवश्यक है, अधिकारी उत्तराखंड भाषा विभाग के ढांचे, विभाग के तहत होने वाले प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, भाषा अध्ययन केंद्रों की स्थापना, पुस्तक मेलों के आयोजन, साहित्य ग्राम की स्थापना, साहित्य कल्याण कोष एवं बुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन योजना के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करें।
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बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि गढ़वाल, कुमाऊं व जौनसार बावर क्षेत्र में विभिन्न अवसरों पर होने वाले पौराणिक गायनों का अभिलेखिकरण एवं दस्तावेजीकरण किया जाए। जौनसार बावर क्षेत्र में पौराणिक काल से प्रचलित पंडवाणी गायन बाकणा जो विलुप्ति के कगार पर है, उसके साथ ही गढ़वाल व कुमाऊं के प्रचलित पौराणिक गायनों के अभिलेखिकरण एवं दस्तावेजीकरण के लिए संबंधित क्षेत्रों में आयोजित होने वाले मेलों व कार्यक्रमों में जाकर स्थलीय निरीक्षण करें।

बैठक में भाषा संस्थान की साधारण सभा के गठन के लिए भी जिलों से साहित्यकारों के नाम मांगे जाने के निर्देश दिए गए। बैठक में सचिव उमेश नारायण पांडेय, निदेशक मायावती डकरियाल, जसंविदर कौर एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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