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उत्तराखड: राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने ली शपथ, कहा- मिलकर लिखेंगे विकास की इबारत

Wed, 15 Sep 2021 08:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 15 Sep 2021 08:08 PM IST
सार

Gurmeet Singh New Governor of Uttarakhand:  राजभवन पहुंचने पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, स्वामी यतीश्वरानंद, मुख्य सचिव एसएस संधू, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव राज्यपाल बृजेश कुमार संत, जिलाधिकारी डा. आरराजेश कुमार, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

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Uttarakhand News: New Governor Lt Gen Gurmeet Singh takes oath today
शपथ लेते हुए नवनियुक्त राज्यपाल गुरमीत सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसम (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को राजभवन में उत्तराखंड के आठवें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

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शपथग्रहण समारोह के बाद राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं स्वावलंबी और बहादुर हैं। यहां की बेटियों को सैनिक स्कूलों व एनडीए के लिए प्रेरित कर राज्य में महिला सशक्तीकरण का नया अध्याय लिखा जाएगा। इससे पहले बुधवार को राजभवन में राष्ट्रगान के साथ शपथग्रहण समारोह की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव एसएस संधू ने किया।

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मुख्य सचिव ने राज्यपाल की नियुक्ति का राष्ट्रपति की ओर से भेजा गया अधिपत्र पढ़कर सुनाया। शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने भारतीय सेना की चार मराठा बटालियन रेजीमेंट द्वारा दिए गए सम्मान गार्ड का निरीक्षण किया। समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडेय, गणेश जोशी, डॉ.धनसिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक समेत कई गण्यमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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पैतृक गांव से भी पहुंचे लोग
राज्यपाल के पैतृक गांव जालाल (अमृतसर) से भी कुछ ग्रामीण करीब तीन हजार गांववासियों की शुभकामनाएं लेकर राजभवन पहुंचे और शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए। अपने गांव के व्यक्ति के राज्यपाल बनने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। समारोह में राज्यपाल के परिजनों, स्कूल कॉलेज और सेना में सेवा के दौरान रहे मित्र और सहपाठी भी शामिल हुए।

प्रदेश के दूसरे सिख और पहले सैन्य पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल
गुरमीत सिंह प्रदेश के पहले सैन्य पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल हैं। सुरजीत सिंह बरनाला के बाद वह राज्य के दूसरे सिख राज्यपाल हैं। सुरजीत सिंह बरनाला उत्तराखंड के पहले राज्यपाल थे।

पूर्व सैनिक व उनके परिवार मेरी प्राथमिकता
राज्यपाल ने कहा कि पूर्व सैनिक, सैनिकों के बुजुर्ग माता-पिता और परिवार उनकी प्राथमिकता हैं। इनके स्वास्थ्य, पेंशन संबंधी समस्याओं के निस्तारण, पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए काम करेंगे।

पवित्र भूमि की सेवा करना सौभाग्य की बात

राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड पवित्र भूमि है, इसकी सेवा करना सौभाग्य की बात है। यहां यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ चार धाम हैं। गंगा और यमुना का मायका है। नानकमत्ता साहिब, रीठा साहिब, हेमकुंड साहिब जैसे अनेक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया कि उनको उत्तराखंड का राज्यपाल बनने का मौका दिया।

उत्तराखंड प्रकृति खजाना, रोजगार की अपार संभावना
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य प्रकृति का खजाना है। इसका सौंदर्य आलौकिक है। उत्तराखंड में पर्यटन आधारित बिजनेस, जैविक कृषि, योग-आयुर्वेद, खाद्य प्रोसेसिंग पर आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर पहाड़ों में रोजगार और उद्यमिता के अपार अवसर पैदा किए जा सकते हैं। वर्तमान सरकार इस दिशा में अच्छा प्रयास कर रही है। आगे भी इसके लिए हर संभव सहयोग राज्य सरकार को हमेशा रहेगा।

तरक्की की नई इबारत लिखनी है
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है। यह टेक्नॉलोजी का युग है। राज्य दो अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगा है। इसलिए कनेक्टिविटी, पुल, सड़क, टनल का संपर्क भी महत्वपूर्ण है। समय के अनुसार विकास और तरक्की की नई इबारत लिखनी है। 

वीर सपूतों को याद किया
राज्यपाल ने प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा के साहस, शौर्य और पराक्रम को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उत्तराखंड से राष्ट्र सुरक्षा के लिए सम्मानित 23 महावीर चक्र, 147 वीर चक्र, 6 अशोक चक्र, 19 कीर्ति चक्र प्राप्त करने वाले वीर योद्धाओं को नमन किया।

उत्तराखंड के अब तक के राज्यपाल
सुरजीत सिंह बरनाला   09 नवंबर 2000-07 जनवरी 2003
सुदर्शन अग्रवाल        08 जनवरी 2003-28 अक्टूबर 2007
बीएल जोशी            29 अक्टूबर 2007 से 05 अगस्त 2009
मार्गेट आल्वा           06 अगस्त 2009 से 14 मई 2012
डॉ. अजीज कुरैशी     15 मई 2012  से   07 जनवरी 2105
डॉ. केके पॉल          08 जनवरी 2015 से 25 अगस्त 2018
बेबी रानी मौर्य            26 अगस्त 2018 से 08 सितंबर 2021
ले.ज. गुरमीत सिंह (सेनि.)  09 सिंतबर 2021 से

सेना में दिखाई जांबाजी, अब राज्यपाल की पारी

सेना में बहादुरी और बुद्धिमता से पराक्रम और शौर्य की गाथा लिखने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह अब राज्यपाल की भूमिका में हैं।

अमृतसर के जलाला उस्मा गांव में हुआ जन्म
गुरमीत सिंह का जन्म एक अप्रैल 1956 को अमृतसर (पंजाब) के जलाला उस्मा गांव में हुआ। उनकी पत्नी गुरमीत कौर और एक पुत्र व पुत्री हैं। उनके पिता मोहाइन सिंह सेना में और बड़े भाई वायु सेना में रहे हैं। उनकी स्कूली शिक्षा कपूरथला सैनिक स्कूल से हुई। 11 जून 1977 को भारतीय सेना की असम रेजीमेंट से कॅरिअर की शुरुआत की। वह डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ भी रहे। वह 31 जनवरी 2016 को सेवानिवृत्त हुए। 

सेवा मेडलों की भरमार
40 साल की सैन्य सेवा के दौरान उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया। थल सेना प्रमुख ने चार राष्ट्रपति पुरस्कार और दो प्रशस्ति दीं।

चीन के साथ मामलों के विशेषज्ञ
कर्नल की भूमिका में उन्होंने सैन्य ऑपरेशन निदेशालय में चीन अनुभाग का नेतृत्व किया। भारत चीन सीमा, वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन से वार्ता में भाग लिया। इसके लिए चीन के सात आधिकारिक दौरे किए। एक बार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। दो पड़ोसी देशों के बीच अंतरिम व दीर्घकालिक समाधान खोजने के उद्देश्य किए गए प्रभावी संवाद के लिए थल सेनाध्यक्ष की प्रशस्ति प्राप्त हुई। रक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वियतनाम, मालदीव, ग्रीस और आस्ट्रेलिया में प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रहे।

स्मार्ट पावर पर पीएचडी कर रहे हैं राज्यपाल 
राज्यपाल वर्तमान में चेन्नई विश्वविद्यालय से स्मार्ट पावर पर पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने भारत-चीन संबंधों पर दो वर्ष की रिसर्च की। भारत चीन संबंधों पर उन्होंने दो वर्ष शोध किया। जवाहर लाल नेहरू विवि और चीनी संस्थान से सीमा मुद्दों का अध्ययन, वाशिंगटन (दक्षिण एशिया सामरिक अध्ययन), राष्ट्रीय रक्षा विवि ताइवान में भी भाग लिया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में चीनी भाषा पाठ्यक्रम में विशिष्ट उपाधि ली, इंदौर डीएवीवी विवि से रक्षा में एमफिल व चेन्नई विवि से दूसरी एमफिल की उपाधि ली।

राज्यपाल के गांव से ही हैं मुख्य सचिव के पूर्वज 

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की जड़ें एक ही गांव से हैं। यह गांव पंजाब प्रांत के अमृतसर में रायाय ब्लाक में जलाल उस्मा नाम से है। राज्यपाल के शपथग्रहण समारोह में शिरकत करने पहुंचे उनके रिश्तेदारों और गांव से आए लोगों ने यह खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव एसएस संधू के पूर्वज भी पहले जलाल उस्मा गांव में ही बसे थे। बाद में वे नजदीक के ही बाबाकला गांव में बस गए। गांव से समारोह में आए ग्रामीण गुरप्रीत सिंह ने बताया कि फ्री स्टाइल कुश्ती के महारथी दारा सिंह भी इसी क्षेत्र के हैं। इस गांव ने भारतीय सेना को कई जांबाज योद्धा दिए। इनमें गुरमीत सिंह भी एक हैं, जिन्होंने एक काबिल सैन्य अफसर से राज्यपाल पद तक पहुंचकर उनके गांव का गौरव बढ़ाया।

मुझे पूरा यकीन है पूरी जिम्मेदारी निभाएगा गुरमीत : जोगेंद्र कौर
राज्यपाल की बड़ी बहन जोगेंद्र कौर ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि उनका भाई राज्यपाल की भूमिका पूरी जिम्मेदारी  से निभाएगा। वह बताती हैं कि गुरमीत बचपन से ही जांबाज और होशियार थे। वह अच्छे घुड़सवार थे और उन्होंने एक बार घोड़ों की रेस जीती थी। वह कहती हैं, गुरमीत से मेरा बहुत लगाव है। जब मां बीमार पड़ी थी तो मैंने ही उसे पाला था। राज्यपाल की  उपलब्धियों का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि उसका कमरा हमेशा पुरस्कारों से भरा रहता था। 

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के बड़े भाई गुरुचरण सिंह भी समारोह में शरीक हुए। वर्तमान में वह दिल्ली के रहवासी हैं। उन्होंने भी राज्यपाल गुरमीत सिंह की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही बहुत साहसी और होशियार रहे हैं। जैसे उन्होंने सेना की सेवा की वैसे ही राज्यपाल की भूमिका में वह उत्तराखंड की सेवा करेंगे। राज्यपाल अपने बचपन के दोस्तों को कभी नहीं भूले। जब भी उन्हें याद किया वे हाजिर हुए। यह कहना है दिल्ली से आए जवाहर धवन का। धवन राज्यपाल के स्कूल के समय के साथी हैं। उनकी मित्रता सैनिक स्कूल कपूरथला में कक्षा छह से 11वीं तक की पढ़ाई के दौरान हुई। स्कूल के समय में हुई दोस्ती आज तक कायम है।

समारोह में बड़ी संख्या में पहुंचे सेना के पूर्व अफसर 
राज्यपाल के शपथग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकारी व उनके परिवार के सदस्य गवाह बनें। शपथग्रहण के बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। एक सैन्य अधिकारी को राज्यपाल बनाए जाने से वे बहुत खुश और उत्साहित थे। पूर्व सैनिकों का दुख दर्द समझेंगे।
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