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Corbett tiger Reserve: कॉर्बेट पार्क में खूब हुई अंधेरगर्दी, अवैध निर्माण से लेकर अवैध कटान तक हुआ

Mon, 08 Aug 2022 11:33 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 08 Aug 2022 11:33 PM IST
सार

कॉर्बेट पार्क में गड़बड़ी का पता चलने के बाद एनटीसीए और बाद में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की टीम ने निरीक्षण करने के साथ रिपोर्ट दी थी। बाद में शासन ने अपर प्रमुख वन संरक्षक व नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।

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Uttarakhand news: illegal construction and illegal felling  in Corbett Tiger Reserve
कॉर्बेट पार्क - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कॉर्बेट पार्क के कालागढ़ वनप्रभाग से लेकर लैंसडाउन वन प्रभाग तक में खूब अंधेरगर्दी हुई थी। पार्क में अवैध निर्माण से लेकर अवैध कटान हुआ था। मामले में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की टीम ने निरीक्षण किया था। मामला सामने आने के बाद शासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति ने रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों का उल्लेख किया था।

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कॉर्बेट पार्क में गड़बड़ी का पता चलने के बाद एनटीसीए और बाद में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की टीम ने निरीक्षण करने के साथ रिपोर्ट दी थी। बाद में शासन ने अपर प्रमुख वन संरक्षक व नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस जांच समिति ने एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें गड़बड़ियों की जानकारी दी गई थी। इसके बाद वन मुख्यालय ने एक पत्र शासन को लिखा था। प्रकरण का हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।
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मोरघट्टी एफआरएच में बनाए गए भवन
वर्ष 2021 में जुलाई से सितंबर तक मोरघट्टी वन विश्राम गृह में भवन बनाया गया। यह कार्य वित्तीय/प्रशासनिक स्वीकृति के किया गया। इस कार्य के लिए कोई बजट उपलब्ध नहीं था। इसी समयसीमा में कालागढ़ से पाखरों कंडी रोड पर पुलिया निर्माण किया गया था, यह काम किसी वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के किया गया। यही पर बात खत्म नहीं होती है, इसी दौर में कालागढ़ टाइगर रिजर्व में छह किमी दीवार के कार्यादेश जारी किए गए। इस कार्य में भारतीय वन अधिनियम का उल्लंघन था। कुगड्डा में एक दर्जन से अधिक भवन निर्माण के कार्यादेश जारी किए गए। दो भवन भी बने थे। इसके लिए कोई भी बजट उपलब्ध नहीं था। कोई भी वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के किया गया। 

पाखरों टाइगर सफारी में नहीं ली गई स्वीकृति
इसके अलावा बिना अनुमति के पाखरो वन विश्राम गृह में भवनों का निर्माण किया गया। यह कार्य भी अवैध रूप से हुआ था। इसके साथ पाखरों टाइगर सफारी के कार्य विधिवत स्वीकृति के पूर्व ही कराए गए थे। बताया जा रहा है कि कुछ कार्य बिना किसी वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति के किए गए थे।


पेड़ों का अवैध पातन भी जमकर हुआ
कालागढ़ में अवैध कटान भी खूब हुआ। इसका उल्लेख जांच रिपोर्ट में कई जगह आने का उल्लेख की बात कही जा रही है। मामले में उप निदेशक ने जांच की थी, इसमें कई पेड़ों के काटे जाने की सूचना दी गई थी। इसके अलावा बाद में कार्बेट पार्क के अंदर बिना अनुमति के बिजली लाइन बिछाने का मामला भी सामने आया था। मामले में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक, अपर प्रमुख वन संरक्षक व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, कॉर्बेट पार्क निदेशक, कालागढ़ वन प्रभाग अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे थे।

मुकदमा दर्ज होने की सूचना वायरल पर घनघनाने लगे फोन
कॉर्बेट पार्क में हुई गड़बड़ी के मामले में विजिलेंस के मुकदमा दर्ज होने की सूचना फैलने के बाद फोन घनघनाने लगे। सोशल मीडिया पर कई अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने की बात कही जा रही थी। पर सभी के नाम को लेकर खुलासा नहीं था। ऐसे में कौन-कौन अधिकारी हो सकते हैं? उसे लेकर कयास लग रहे थे। लोग वस्तुस्थिति जानने के लिए फोन घनघनाने लगे।

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