उत्तराखंड: अधिकतम पांच फीसदी बढ़ जाएगा भवन कर, निकाय क्षेत्रों में सर्किल रेट के हिसाब से लगेगा
प्रदेश के निकायों में अब जियोग्राफिक इंफारमेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित मैप से संपत्ति का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में निकाय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जेब ढीली होने वाली है। शासन ने सर्किल रेट के हिसाब से भवन कर का अंतरिम शासनादेश जारी कर दिया है। सर्किल रेट के हिसाब से निकाय क्षेत्र में रहने वाले लोगों का भवन कर अधिकतम पांच प्रतिशत तक बढ़ेगा। निकायों से इस अंतरिम शासनादेश में सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव के बाद शासन इसका अंतिम आदेश जारी करेगा। इसके बाद निकायों को अपनी बोर्ड बैठक में इस शासनादेश को पास करना होगा।
निकायों में अब जियोग्राफिक इंफारमेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित मैप से संपत्ति का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसके बाद कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति नहीं छुपा सकेगा। भवन कर लगाने में पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अब सर्किल रेट के हिसाब से भवन कर लगेगा। शासनादेश में कहा गया है कि भवन कर अब तक लग रहे कर से अधिकतम पांच प्रतिशत बढ़ेगा। यदि सर्किल रेट के हिसाब से भवन कर कम हुआ तो पुराना भवन कर ही लगाया जाएगा। कर किसी भी दशा में कम नहीं होगा। शासन ने निकायों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। सुझाव के बाद अंतिम आदेश जारी होगा।
अब तक ऐसे लगता था कर
निकायों में स्वकर प्रणाली लागू थी। इसमें सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कर तय था। खाली प्लाटों से कर नहीं लिया जाता था।
यह है टैक्स लगाने का फार्मूला
भवन कर लगाने में सर्किल रेट, प्लॉट का खाली कुल क्षेत्रफल और प्लॉट में बने मकान का कुल क्षेत्रफल को आधार बनाया गया है। खाली भूमि का क्षेत्रफल सर्किल रेट और भवन का क्षेत्रफल (कवर्ड एरिया) सर्किल रेट जो निकलकर आएगा, इन दोनों के योग संपत्ति का वार्षिक मूल्यांकन कहलाएगा। इस पर 0.01 से लेकर एक प्रतिशत तक कर लगेगा। इस कर का निर्धारण निकायों का बोर्ड तय करेगा।
प्रॉपर्टी की सूचना छुपाई तो पांच हजार लगेगा जुर्माना
नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति की जानकारी 90 दिन के भीतर निकायों को देनी होगी। अगर किसी भू स्वामी ने अपनी संपत्ति छुपाई तो उन्हें पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह अधिकार निकायों को दिया गया है।
निकाय के अधिकारी किसी भी संपत्ति में घुसकर कर सकते हैं नपाई
शासनादेश में नगर निगम को टैक्स मामले में अपार शक्तियां प्रदान की गईं हैं। निकायों में रहने वाला कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति छुपाता है या उसका गलत आकलन पेश करता है तो निकाय का अधिकारी उस संपत्ति का सर्वे कर सकता है। अगर संपत्ति का मालिक अधिकारियों को रोकेगा तो निगम उस पर 353 आईपीसी की धारा में कार्रवाई भी कर सकता है।
निकाय क्षेत्र में संपत्ति खरीदने पर निगम को देनी होगी 90 दिन में सूचना
कोई व्यक्ति अगर निकाय क्षेत्र में नई संपत्ति खरीदता है तो निगम, पालिका और पंचायत के अधिकारियों को उसे 90 दिन के भीतर सूचना देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर निगम संपत्ति मालिक पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
25 प्रतिशत एरिया वृद्धि करने पर 60 दिन में निकाय को देनी होगी सूचना
निकाय क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति अपने भवन के क्षेत्रफल में अगर 25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा तो उसे 60 दिन के भीतर निकाय के अधिकारियों को सूचना देनी होगी।
ऐसे समझिए : मान लीजिए निकाय क्षेत्र में आपका कवर्ड एरिया 1000 वर्ग फीट है। आपने 250 वर्ग फीट और कवर्ड कर दिया या भवन को एक तल और बढ़ा दिया तो निकाय को इसकी सूचना देनी होगी।
खाली प्लॉट पर भी लगेगा कर
निकाय क्षेत्र में अगर किसी व्यक्ति का खाली प्लाट है तो उसे भी सर्किल रेट के हिसाब से कर देना होगा। अभी खाली प्लॉटों पर कर नहीं लगता है। इस शासनादेश के लागू होने के बाद कर लग जाएगा।
एकमुश्त टैक्स जमा करने पर पांच प्रतिशत मिलेगी छूट
भवन और स्वच्छता कर एक मुश्त पूरे साल का जमा करने पर पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। शासनादेश में कहा गया है कि एक अप्रैल से 30 जून तक एकमुश्त कर जमा करने पर पूरे टैक्स पर पांच प्रतिशत छूट दी जाएगी। इस साल यह छूट 31 दिसंबर तक लागू होगी।