Almora: घरवालों ने डांटा तो नाराज होकर घर से भागे चार बच्चे, जंगल के बीच टेंट में भूखे-प्यासे बिताए 24 घंटे
चारों बच्चे सोमवार दोपहर बाद घर से निकल गए। पुलिस ने उन्हें मंगलवार देर शाम बरामद किया। बच्चों ने भूखे-प्यासे दहशत के बीच 24 घंटे बिताए।
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर के दूरस्थ गांव कांटली में परिजनों की फटकार से नाराज होकर तीन बच्चे एक पड़ोसी बच्चे को साथ लेकर घर से भाग गए। सूचना के बाद पुलिस ने उनकी खोजबीन शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद चारों को 24 घंटे बाद घने जंगल के बीच एक लावारिस टेंट के भीतर से बरामद किया गया।
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सोमेश्वर के कांटली गांव में नेपाली मूल का कर्ण बहादुर अपने तीन बच्चों के साथ रहता है। दो वर्ष पूर्व उसकी पत्नी उसे और बच्चों को छोड़कर चली गई। बीते सोमवार को किसी बात को लेकर उसने बच्चों को डांटा जिससे नाराज होकर तीनों पड़ोस में रहने वाली एक 10 वर्षीय बच्ची को साथ लेकर घर से निकल गए। देर शाम जब कर्ण बहादुर घर लौटा तो बच्चों को घर में न पाकर घबरा गया। उसने ग्रामीणों के साथ बच्चों की काफी खोजबीन की लेकिन कहीं पता नहीं चला। ग्रामीणों ने सूचना पुलिस को दी।
एसएसी के आदेश पर पुलिस ने टीमों का गठन कर बच्चों की खोजबीन शुरू की। टीम घंटों आसपास व पिनाकेश्वर के जंगलों की खाक छानती रही। अंत में 24 घंटे बाद बीते मंगलवार देर शाम चारों बच्चे घने जंगल के बीच लावारिस पड़े टेंट के भीतर एक पुरानी चारपाई के नीचे सुरक्षित मिले। बच्चों के मिलने के बाद पुलिस सहित परिजनों ने राहत की सांस ली। पुलिस ने बच्चों को परिजनों को सौंपा। टीम में थानाध्यक्ष सोमेश्वर विजय सिंह नेगी, कांस्टेबल अरविंद सिंह, कुलदीप, सूरज, भुवन, महिला एसआई मोनी टम्टा, विपिन जोशी, श्रवण सैनी, वेद प्रकाश, कुंदन वर्मा, दीपक कुमार शामिल रहे।
बच्चों ने भूखे-प्यासे बिताए 24 घंटे
चारों बच्चे सोमवार दोपहर बाद घर से निकल गए। पुलिस ने उन्हें मंगलवार देर शाम बरामद किया। बच्चों ने भूखे-प्यासे दहशत के बीच 24 घंटे बिताए। पुलिस टीम को देखकर बच्चों का हौसला बढ़ा तो उन्होंने आपबीती सुनाई।
बाहर गुर्राता रहा तेंदुआ, टेंट के भीतर दुबके रहे बच्चे
बच्चे घर से निकलकर पिनाकेश्वर के घने जंगलों के बीच पहुंच गए। घने जंगल के बीच एक लावारिस टैंट देख बच्चों ने अपनी सुरक्षा के लिए इसे ठिकाना बनाया। रात होते ही एक तेंदुआ टेंट के पास पहुंच गया। वह रात भर टेंट के बाहर गुर्राता रहा और बच्चे भीतर पड़ी पुरानी चारपाई के नीचे रहे। यदि तेंदुआ टेंट के भीतर प्रवेश करता तो बढ़ी घटना हो सकती थी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बच्चों के लापता होने की सूचना पर टीम ने उनकी खोजबीन के लिए पिनाकेश्वर के जंगल में प्रवेश किया। जब टीम जंगल के काफी भीतर तक घुस गई तो उन्हें आसपास में तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनाई दी।
टीम तेंदुए के गुर्राने की आवाज को लक्ष्य मानकर अनहोनी की आशंका के साथ आगे बढ़ी। तभी टीम को जंगल के बीच एक टेंट नजर आया जिसके नजदीक ही तेंदुआ गुर्रा रहा था। टीम ने हौसला दिखाते हुए टेंट के भीतर प्रवेश किया तो चारों बच्चे यहां रखी एक पुरानी चारपाई के नीचे दुबके मिले। बच्चों को सुरक्षित देख टीम ने राहत महसूस की। बच्चों ने पुलिस टीम को बताया कि तेंदुआ पूरी रात टेंट के आसपास घूमता व गुर्राता रहा। उसके भय से वे बगैर आवाज किए चारपाई के नीचे दुबक गए और दहशत में रात बिताई।
नेपाल भागने की फिराक में थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक तीनों बच्चे पड़ोसी बच्ची को साथ लेकर घर से निकले। सभी की नेपाल जाने की योजना थी लेकिन रास्ता भटकने से वे जंगल की तरफ चले गए। रात होने पर चारों जंगल के बीच लावारिस टेंट में घुस गए लेकिन बाहर तेंदुए के गुर्राने से वे वहां से निकल नहीं सके।
बच्चों के लापता होने की सूचना मिलते ही टीमों का गठन किया गया। टीम ने सक्रियता से चारों को सुरक्षित बरामद किया है जो तारीफ के काबिल है। पूरी टीम को सम्मानित किया जाएगा।
- प्रदीप कुमार राय, एसएसपी, अल्मोड़ा।