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उत्तराखंड : देवस्थानम पर फिर बोले पूर्व मुख्यमंत्री, पृष्ठभूमि को समझकर निर्णय लेना चाहिए

Mon, 12 Apr 2021 01:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 12 Apr 2021 01:25 PM IST
सार

  • कहा, जिस हिसाब से आने वाले समय में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ेगी, उसी हिसाब से तैयारी की जरूरत
  • थोड़ा विरोध हर जगह होता है लेकिन दूरदृष्टि से कैबिनेट ने लिया था देवस्थानम बोर्ड का फैसला

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uttarakhand news : Former chief minister trivendra singh rawat said again on Devasthanam, before decision should understand background
त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

विस्तार

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले उसकी पृष्ठभूमि को समझना बेहद जरूरी है।

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रविवार को गांधी रोड स्थित गांधी इंटर कॉलेज परिसर में मेयर सुनील उनियाल गामा की माता की तेरहवीं में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मीडिया से रूबरू हुए। जब उनसे देवस्थानम बोर्ड को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मंदिर पहले से ही बद्री-केदार मंदिर समति के अधीन थे। इनकी संख्या करीब 45 से 48 थी।
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दो-तीन मंदिरों का और प्रस्ताव आया था, जिन्हें इसमें जोड़ा गया था। कुछ और मंदिरों के प्रस्ताव आए। राज्य में कई जगह लोगों ने स्वेच्छा से काम किया। जैसे जागेश्वर मंदिर से जुड़े लोगों ने डीएम की अध्यक्षता में ट्रस्ट खुद बनाया। उन्होंने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले उसकी पृष्ठभूमि को समझना चाहिए।
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थोड़ा बहुत विरोध हर काम का होता है, लेकिन व्यापक हित में और दूरदृष्टि के तहत यह निर्णय कैबिनेट ने लिया था। हवाई सेवाएं बढ़ गई हैं। चारधाम ऑल वेदर रोड बन गया है। इससे प्रदेश में आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में इजाफा होगा। पिछली बार करीब 36 लाख तीर्थयात्री आए थे। आने वाले समय में यह संख्या करोड़ों में जाएगी। हमको उसी हिसाब से तैयारी करने की जरूरत है।

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष बोले, कभी नहीं रहा सरकारी हस्तक्षेप

देवस्थानम बोर्ड पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान पर गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष व देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत के संयोजक सुरेश सेमवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को कहा कि वह पहले अध्ययन करें और उसके बाद मीडिया में सार्वजनिक बयान दें। कहा कि गंगोत्री मंदिर समिति पूर्व से ही स्वतंत्र थी।

इसमें किसी भी तरह का सरकारी हस्तक्षेप नहीं रहा। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि गंगोत्री मंदिर समिति स्वायत्तशासी संस्था है तथा इसके पास वित्तीय व प्रबंधकीय अधिकार है। सुरेश सेमवाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा यह कहा गया था कि गंगोत्री और यमुनोत्री में व्यवस्थाएं एसडीएम देखते थे।


सुरेश सेमवाल ने कहा कि गंगोत्री मंदिर को कभी किसी भी प्रशासक द्वारा नियंत्रित नहीं किया गया। वर्तमान में मुखबा गांव के सेमवाल जाति के पांच तोकों के 5000 से अधिक सेमवाल ब्राह्मण गंगोत्री स्थित मंदिर एवं मुखबा स्थित शीतकालीन पूजा स्थल में मां गंगा की पूजा, अर्चना मंदिर प्रबंधन एवं संचालन का दायित्व निभाते हैं।

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