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उत्तराखंड: पहले उद्योग बसाए, अब गलत आवंटन बताकर 60 उद्योगों को नोटिस थमाए

Mon, 26 Jul 2021 01:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भूपेंद्र राणा , अमर उजाला, देहरादून
भूपेंद्र राणा , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 26 Jul 2021 01:04 PM IST
सार

राज्य गठन के बाद सरकार ने सेलाकुई में खसरा नंबर 323 पट्टे की जमीन को फ्री होल्ड के रूप में अधिसूचित किया। जिसमें कई उद्यमियों ने जमीन खरीद कर उद्योग स्थापित किए हैं।

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uttarakhand news: first set up industries, now give notices to 60 industries on wrong allocation
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने देहरादून में सेलाकुई की जिस जमीन पर उद्योगों को बसाया था। अब अपने ही उस आवंटन को गलत बताकर लगभग 60 उद्यमियों को नोटिस थमा दिए।

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विकास नगर के स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उद्यमियों को गलत तरीके से पट्टे की जमीन फ्री होल्ड कर बेची गई। जमीन के गलत आवंटन होने के नोटिस देने से उद्यमियों की मुश्किल बढ़ गई है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि एक तरफ सरकार निवेशकों को उत्तराखंड में उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन का दावा कर रही है, वहीं, दूसरी ओर पहले से आवंटित भूमि पर नोटिस देकर वहां लगे उद्योगों को हतोत्साहित किया जा रहा है। 
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राज्य गठन के बाद सरकार ने सेलाकुई में खसरा नंबर 323 पट्टे की जमीन को फ्री होल्ड के रूप में अधिसूचित किया। जिसमें कई उद्यमियों ने जमीन खरीद कर उद्योग स्थापित किए हैं। गलत तरीके से पट्टे की जमीन फ्री होल्ड पर उद्योगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि सरकार की अनुमति के बाद ही उद्यमियों ने जमीन खरीद कर उद्योग लगाए गए हैं। बाकायदा उद्योगों के नक्शे पास होने के साथ ही जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। यहां तक वर्ष 2003 में इसी खसरा नंबर पर स्थापित उद्योगों को केंद्रीय औद्योगिक स्कीम के तहत टैक्स छूट का लाभ दिया गया। 
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उत्तराखंड इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन महासचिव महेश शर्मा का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2002 में सेलाकुई क्षेत्र में खसरा नंबर 323 को अधिसूचित किया था। जिसके बाद उद्यमियों ने जमीन खरीद कर उद्योग लगाए। इतने सालों के बाद पट्टे की जमीन को गलत तरीके से आवंटित बताकर उद्योगों को नोटिस दिए जा रहे हैं, जिससे कई उद्यमी परेशान हैं।

सरकार की अनुमति के बाद लीगल रूप से उद्योग स्थापित हुए

सेलाकुई क्षेत्र में खसरा नंबर 323 में स्थापित कई उद्योगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सरकार की अनुमति के बाद लीगल रूप से उद्योग स्थापित हुए हैं। इस मामले को लेकर शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
- विपुल डावर, अध्यक्ष, सीआईआई, उत्तराखंड

पहले सरकार ने उद्योग लगाने को जमीन दी। अब उसी जमीन को सरकार गलत बता कर उद्यमियों को नोटिस दे रही है। पूरी तरह से गलत है। ऐसे में बाहर से कोई भी निवेश उत्तराखंड में पूंजी निवेश करने नहीं आएगा। जिस समय उद्यमियों ने नक्शे पास किए और जमीन की रजिस्ट्री कराई। उस समय प्रशासन कहां था। उद्यमियों ने सरकार की अनुमति के बाद ही उद्योग लगाए। उद्योगों को जो नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई जिम्मेदारी अफसरों से की जाए। उद्योगों के बजाय अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्री 
 
प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि प्रबंधन व अवस्थापना विकास के लिए वर्ष 2002 में सिडकुल का गठन किया गया। अब तक प्रदेश में सात औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल की ओर से विकसित किए गए। राज्य गठन से पहले उद्योग विभाग और यूपीएसआईडीसी के माध्यम से 2116.62 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था। 
 
औद्योगिक क्षेत्र              -     भूमि एकड़ में
फार्मा सिटी सेलाकुई     -         50
आईटी पार्क               -        67
बीएचईएल हरिद्वार      -          1695
पंतनगर                    -        3234
सितारगंज                 -        1093
सितारगंज फेज-दो       -          1700
सिगड्डी कोटद्वार         -           100
कुल                     -           7939 एकड़

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