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Uttarakhand: सचिव स्वास्थ्य का अल्टीमेटम, नशा मुक्ति केंद्रों का तीन माह में न कराया पंजीकरण तो होंगे बंद
Fri, 01 Sep 2023 11:35 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 01 Sep 2023 11:35 PM IST
सार
सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में मानसिक स्वास्थ्य देखरेख नीति की नियमावली को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया।
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नशा मुक्ति केंद्र
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य देखरेख नीति की नियमावली को सख्ती से लागू करने के लिए नशा मुक्ति केंद्रों को तीन माह के भीतर राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में पंजीकरण करना होगा। सचिव स्वास्थ्य व राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि तय समय सीमा में पंजीकरण न करने वाले नशा मुक्ति केंद्रों को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
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शुक्रवार को सचिवालय में सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में मानसिक स्वास्थ्य देखरेख नीति की नियमावली को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया। सचिव ने कहा कि प्रदेश में नियमावली लागू की गई है। इसके तहत राज्य में संचालित सभी सरकारी व गैर सरकारी मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, नशा मुक्ति केंद्रों को तीन माह के भीतर राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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मानसिक स्वास्थ्य देखरेख (राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण उत्तराखंड) विनियमावली 2023, उत्तराखंड मानसिक स्वास्थ्य देखरेख (मानसिक रुग्णता से ग्रसित व्यक्तियों के अधिकार) 2023, मानसिक स्वास्थ्य स्थापना और नशा मुक्ति केंद्रों के स्थापन व संचालन के लिए न्यूनतम मानकों की अधिसूचना जारी हो चुकी है। इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए संस्थानों व आम लोगों को जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।
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सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित मानसिक स्वास्थ्य पुनर्विलोकन बोर्डों के सरकारी व गैर सरकारी सदस्यों, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों के लिए बेहतर तरीके से कार्य कर सकेंगे।
बैठक में संयुक्त सचिव महावीर सिंह चौहान, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. भागीरथी जंगपांगी, डॉ. अमनदीप सिंह, डॉ. केएस नेगी, डॉ. मयंक बडोला, डॉ. विनय शर्मा, अनिल सती, रहेश राणा, एनजीओ के सदस्य अतुल गुडविन सिंह, लक्ष्मण बालन, पवन रेखा, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. प्रियरजन अविनाश आदि मौजूद थे।