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बूढ़े पिता ने लड़ी इंसाफ की लड़ाई:  20 साल बाद हुआ न्याय, दो भाइयों को मिलेगा पीआरडी के स्वयं सेवक का दर्जा

Thu, 25 Jul 2024 02:48 PM IST
रेनू सकलानी अवनीश चौधरी, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून
अवनीश चौधरी, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 25 Jul 2024 02:48 PM IST
सार

20 साल बाद दो भाइयों को पीआरडी के स्वयं सेवक का दर्जा मिलेगा। बूढ़े पिता ने आरटीआई के जरिए इंसाफ की लड़ाई लड़ी। जिसके बाद सूचना आयुक्त ने पीआरडी प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया।
 

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Uttarakhand News After 20 years two brothers will get the status of PRD volunteer
सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

एक भाई ने प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के लिए प्रशिक्षण लिया। दूसरे भाई ने प्रशिक्षण लेने के बाद पीआरडी की ड्यूटी भी निभाई, इसके बावजूद नियमों के फेर में दोनों को पीआरडी जवान बनने से वंचित रखा गया। ऐसे में 72 साल के बुजुर्ग पिता ने आरटीआई के जरिए बेटों को इंसाफ दिलाने की ठानी। अब 20 साल बाद दोनों भाइयों को पीआरडी में पहचान मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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बीती दो जुलाई को राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने आदेश जारी कर दिया है कि दोनों भाइयों के लिए पीआरडी का स्वयं सेवक प्रमाण पत्र जारी किया जाए। इस आदेश पर आगामी छह सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश हैं।

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प्रमाण पत्र नहीं हुई था जारी
याचिकाकर्ता 72 साल के जयप्रकाश पौडी गढ़वाल में रहते हैं। उनके बेटे देशबंधु और दीनबंधु ने साल 2004 में अर्द्धकुंभ मेले से पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बाद में दीनबंधु खराब स्वास्थ्य के कारण ड्यूटी नहीं कर सके, दूसरे भाई देशबंधु ने ड्यूटी की।

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यह प्रशिक्षण पुलिस विभाग की देखरेख में 27 जनवरी से 3 फरवरी 2004 के मध्य हुआ था। प्रमाण पत्र न दाखिल करने के पीछे पीआरडी की ओर से आयोग को वजह बताई गई कि शिविर मात्र आठ दिन का हुआ था इसलिए प्रमाण पत्र नहीं जारी हुआ। पीआरडी एक्ट 1948 के तहत 22 दिन के अर्धसैन्य प्रशिक्षण और 15 दिन फिर से प्रशिक्षण के बाद ही प्रमाण पत्र दिए जाने का प्रावधान है।

यह बड़ी चूक का दर्शाता है: सूचना आयुक्त
सभी पक्षों को सुनने के बाद सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश जारी किया। उन्होंने टिप्पणी की कि प्रशिक्षण लेने और ड्यूटी करने के बावजूद पीआरडी में स्वयंसेवक पंजीकृत न होना आश्चर्यजनक है। यह जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी के स्तर पर बड़ी चूक का दर्शाता है।

किसी प्रशिक्षण के बाद भी प्रमाण पत्र जारी न होना प्रशिक्षण नहीं होने के समान है। युवा कल्याण निदेशक और पीआरडी से अपेक्षा है कि इस तथ्य पर गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेकर किसी भी प्रशिक्षण के बाद उसका प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जारी करने की व्यवस्था पर विचार किया जाए। - योगेश भट्ट, राज्य सूचना आयुक्त

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न्याय के इंतजार में दोनों बेटों के 20 साल गुजर गए, अब तो बस यही उम्मीद है कि कम से कम उनकी पीआरडी स्वयं सेवक के तौर पर ही पहचान सुनिश्चित हो जाए। -जयप्रकाश, बुजुर्ग पिता


 

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