विभागों को लेकर हरीश के खिलाफ फूटा असंतोष
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विभागों के बंटवारे न होने का मंत्रियों का असंतोष रविवार को एक बार फिर से तूल पकड़ गया। बिना विश्वास में लिए जैविक बोर्ड का अध्यक्ष पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ को बनाने के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह के आरोप ने इस मामले में आग में घी का काम किया।
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पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने यह कहकर इस आग को और हवा दे दी कि मंत्रियों का असंतोष दूर किया जाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने साफ ही कह दिया कि मंत्रियों के असंतोष को दूर किया जाना चाहिए। गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने भी कहा कि मंत्रियों को विभाग अब बांट दिए जाने चाहिए।
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रविवार को इस बात के संकेत भी मिले कि विभागों के बंटवारे की अभी तक दबी जुबान में मांग कर रहे मंत्रियों के सुर जल्द ही हरक के सुर से मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत जरूर सारी गलती अपने खाते में दर्ज कर इस असंतोष को थामने की कोशिश करते दिखाई दिए।
एक ही दिन में भूल गए एकजुटता का पाठ
शनिवार को कांग्रेस की विस्तारित प्रदेश कमेटी की बैठक में एकजुटता का पढ़ा गया पाठ रविवार की शाम होते-होते धाराशायी हो गया। पहला बुलबुला कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की नाराजगी के रूप में फूटा।
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शनिवार को ही पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ ने बीज प्रमाणीकरण और जैविक परिषद के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था। बहुगुणा कैबिनेट में हरक सिंह कृषि मंत्री थे और उनके पास ये दोनों ही निगम थे।
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हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद हरक सिंह ने दोबारा मंत्री पद की शपथ ली पर विभाग उन्हे अभी मिले नही है। इतना जरूर रहा कि सत्र में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सदन की कार्यवाही क संचालन के लिए मंत्रियों के पास पुराने विभाग बने रहेंगे। लिहाजा मंत्री विभागों के मंत्री न होते हुए भी विभागों को अपने पास मान रहे हैं।
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ऐसे में जैविक बोर्ड का अध्यक्ष बेहड़ को बनाए जाने से हरक सिंह खासे नाराज हो गए।
'हरीश कहते तो, निगम क्या, मंत्री पद भी छोड़ देता'
शनिवार को तो सिर्फ चर्चा ही थी, रविवार को कांग्रेस सरकार के कद्दावर मंत्री हरक सिंह की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। दो दिन पहले ही हरक सिंह कैबिनेट की बैठक में अपने साथी मंत्री से उलझ पड़े थे। इसकी अनुगूंज शनिवार को प्रदेश कांग्रेस विस्तारित कमेटी की बैठक में भी सुनाई दी।
रावत की नाराजगी की वजह इस बार पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ को जैविक बोर्ड का अध्यक्ष पद दिया जाना रहा। बेहड़ को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया।
हरक ने कहा
बेहड़ तो मेरे मित्र हैं। सवाल इस बात का नही है कि जैविक बोर्ड का उन्हें अध्यक्ष बना दिया गया। सवाल इस बात का है कि जैविक बोर्ड के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर कैसे दी गई। कम से कम मुझे तो विश्वास में लेना चाहिए था। जैविक बोर्ड का अध्यक्ष तो मै हूं। मुख्यमंत्री मुझसे कहते तो बोर्ड अध्यक्ष पद क्या में मै मंत्री पद से इस्तीफा देने में एक क्षण की देर नहीं करता।
-हरक सिंह, कैबिनेट मंत्री
हरक से माफी मांगने को तैयार हरीश
मुख्यमंत्री हरीश रावत इस सारे मामले को अपनी गलती मानकर बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। रावत ने एक कार्यक्रम में कहा कि यह सारी गलती उनके खाते में दर्ज की जाए।
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रावत के इस बयान के बाद भी विभागों के बंटवारे का सवाल अपनी जगह कायम हैं। कुछ समय पहले हरीश रावत ने खुद ही कहा था कि 11 फरवरी तक मंत्रियों को विभाग बंट जाएंगे।
हरीश बोले
हर गलती को मेरे खाते में दर्ज किया जाए। इस समय कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि मिलजुलकर किस तरह से आगे बढ़ें। कुछ गलत हुआ है तो हरक सिंह से मैं क्षमा याचना कर लूंगा। इस मामले में हरक सिंह से बात करके नाराजगी के कारण को दूर किया जाएगा।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री
सदन में भी गूंज सकता है विभागों का मुद्दा
पिछले कई दिनों से मंत्रियों के विभागों को लेकर विपक्ष सदन में भी सत्ता पक्ष पर हमलावर रहा है। सोमवार को फिर सत्र है और विभागवार अनुदान मांगे पारित कराने में जुटी कांग्रेस को फिर विपक्ष के सवालों का जवाब देना पड़ सकता है।
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विपक्ष नेता सदन पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाकर एक बार पहले भी सदन से बहिर्गमन कर चुका है।
विपक्ष का आरोप यह है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सदन में पहले तो यह कहा कि मंत्रियों के विभागों को लेकर राज्यपाल से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया है। बाद में सदन में राज्यपाल का जो पत्र बांटा गया उसमें कहा गया कि राज्यपाल की सलाह पर मंत्रियों के विभाग मुख्यमंत्री के पास रहेंगे।
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विपक्ष का कहना था कि मंत्रियों को विभाग न देना इस बात की ओर भी इशारा कर रहा है कि सरकार में पोर्टफोलियो को लेकर खींचतान है। हालांकि इस पर पीठ की ओर से फैसला सुनाया जा चुका है पर हरक की नाराजगी के सामने आने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को सदन में भुनाने की कोशिश कर सकता है।