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नतीजे 2019: भाजपा के इस दिग्गज ने कैसे तय किया गांव की पगडंडी से संसद तक का सफर, पढ़िए

Fri, 24 May 2019 09:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पौड़ी
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पौड़ी Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 24 May 2019 09:08 AM IST
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Uttarakhand Lok Sabha Election 2019 Result Bjp leader tirath singh rawat struggle story
तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड की गढ़वाल संसदीय सीट से भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत ने संसदीय राजनीति में पहला कदम रख लिया है। पौड़ी-गढ़वाल सीट पर भाजपा प्रत्याशी तीरथ सिंह रावत ने जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूड़ी को 302669 वोटों के अंतर से हराया। तीरथ को 506980 और मनीष खंडूरी को 204311 वोट मिले हैं। गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका यह सफर धैर्य, सहनशीलता, कर्मठ कार्यकर्ता की उनकी छवि को और मजबूत बना गया। अभाविप कार्यकर्ता के रुप में राजनीति शुरू करने वाले तीरथ का अभिभाजित उत्तर प्रदेश और उसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में विशेष दखल रहा है।

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जनपद पौड़ी के कल्जीखाल ब्लाक के सीरों गांव के मूल निवासी तीरथ रावत का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है। स्व. कलम सिंह रावत के सबसे छोटे बेटे तीरथ ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर से छात्र राजनीति शुरू की। वर्ष 1992 में वह सबसे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गढ़वाल विवि बिड़ला परिसर श्रीनगर के छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और जीते।
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इसके बाद वे अभाविप के प्रदेश संगठन मंत्री, भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे। वर्ष 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के सदस्य निर्वाचित हुए। पृथक राज्य उत्तराखंड का गठन होने पर वर्ष 2000 में राज्य की अंतरिम सरकार में तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के पहले शिक्षा मंत्री बने। वर्ष 2007 में भाजपा प्रदेश महामंत्री, प्रदेश सदस्यता प्रमुख, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष चुने गए।

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प्रदेश अध्यक्ष, प्रत्याशी और प्रभारी के रुप में दिया शत-प्रतिशत परिणाम

वर्ष 2012 में विधानसभा चौबट्टाखाल से विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2017 में सिटिंग विधायक होते हुए टिकट कटने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में तीरथ हिमाचल प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन में दो माह तक जेल में रहे तीरथ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 

नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और प्रत्याशी के रुप में शत-प्रतिशत परिणाम दिए। तीरथ को 2013 में भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं। लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने तीरथ को गढ़वाल सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के प्रभारी का दायित्व भी सौंपा। उन्होंने अपनी जीत के साथ हिमाचल प्रदेश की चारों सीटें जिताकर पार्टी में खुद के कद को और मजबूत किया।

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