फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand information commissioners pensions stop.

आपदा घोटाले का खुलासा करने पर अफसरों को मिली सजा

Thu, 04 Jun 2015 03:16 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 04 Jun 2015 03:16 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand information commissioners pensions stop.

सूचना के अधिकार अधिनियम के नोडल सामान्य प्रशासन विभाग ने उत्तराखंड के सूचना आयुक्तों की पेंशन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

विज्ञापन


आरटीआई के तहत आपदा राहत घोटाले के खुलासे के बाद यह राज्य सूचना आयोग पर सीधा हमला भी माना जा रहा है। पेंशन रोकने के पीछे शासन ने सीमित संसाधन होने का तर्क दिया है।

हालांकि प्रदेश सरकार मुख्य सूचना आयुक्तों को पेंशन के अतिरिक्त 14 हजार रुपए अलग से भी दे रही है। इसके अलावा सेवा का अधिकार आयोग सहित आधा दर्जन आयोग हैं जिनमें सरकार पेंशन का लाभ दे रही है।
विज्ञापन


सामान्य प्रशासन के प्रभारी सचिव शैलेश बगोली की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संवैधानिक निकायों केपदधारको को पेंशन का लाभ देने से प्रदेश सरकार के राजकोष पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इससे विकास कार्यों के लिए आर्थिक संसाधनों की कमी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे देखते हुए ही प्रदेश सरकार ने 2005 में अंशदायी पेंशन योजना शुरू की थी। राज्य सरकार इस स्थिति में नही है कि राज्य सूचना आयुक्तों को पेंशन लाभ दे सके। शासनादेश में स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्य सूचना आयुक्तों को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन नहीं दी जाएगी और इस आदेश को जारी करने में कार्मिक, न्याय और वित्त्त की सहमति ले ली गई है।

सरकार के इस फैसले को राज्य सूचना आयोग पर सीधा हमला भी माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही सूचना के अधिकार अधिनियम में राज्य सूचना आयुक्त ने आरटीआई एक्टिविस्ट भूपेंद्र कुमार की अपील पर आपदा राहत घोटाले की सीबीआई जांच का आग्रह किया था।

पूर्व सूचना आयुक्त ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

uttarakhand information commissioners pensions stop.

आपदा राहत जैसे संवेदनशील मसले पर इस सूचना के बाद से ही हंगामा बरपा है। इस आदेश के तहत ही सामान्य प्रशासन ने हाल ही में सेवानिवृत्त हुए विनोद नौटियाल की पेंशन भी रोक ली है।

यह तब है जबकि प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक आयोगों के पदाधिकारियों को सरकार पेंशन लाभ दे रही है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने सूचना आयुक्तों की पेंशन पर रोक लगाई है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि राज्य पेंशन दे रहे हैं। कर्नाटक में राज्य सूचना आयुक्तों को 40 हजार रुपए प्रति माह की पेंशन दी जा रही है।

पूर्व राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सूत्रों के मुताबिक विनोद नौटियाल ने सेवानिवृत्ति से पहले ही इस मामले को मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने उठाया था।

उस समय राज्य सूचना आयुक्त को पेंशन न रोके जाने का आश्वासन दिया गया था। दिसंबर 2014 में विनोद नौटियाल सेवानिवृत्त हुआ और इसके बाद भी उनकी पेंशन जारी ही नहीं की गई। इसी मामले को लेकर विनोद नौटियाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।

भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले आयुक्तों के लिए भी कर दिया आदेश
शासनादेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले आयुक्तों को भी पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा। विशेषज्ञ शासनादेश की इस भाषा पर भी एतराज जता रहे हैं। इनका कहना है कि राज्य सरकार में बदलाव होता है तो नई सरकार क्या इस प्रावधान को बदल नहीं सकती।

आयोग भी कर रहा है जवाब तैयार

राज्य सूचना आयुक्तों में भी शासन के इस आदेश को लेकर खासी नाराजगी है। सूत्रों के मुताबिक आयोग की ओर से आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी है। आयोग का कहना है कि किसी भी राज्य में ऐसा नही है कि किसी सूचना आयुक्त की पेंशन रोकी हो।

एक्ट में भी स्पष्ट रूप से सूचना आयुक्तों को मुख्य सचिव के बराबर वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्त अनुमन्य की गई हैं। इसी तरह मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन, भत्ता और अन्य सेवा शर्त वही होगा जो निर्वाचन आयुक्त का है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed