फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High court Told Government tO Submit Plan in Court for Save Environment

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने कहा- पर्यावरण बचाना भी सरकार का काम, कोई प्लान हो तो चार हफ्ते में करें पेश

Thu, 04 Mar 2021 12:09 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 04 Mar 2021 12:09 AM IST
सार

  • 60 फीसदी से कम घनत्व वाले जंगलों को वन नहीं मानने के खिलाफ दायर याचिक ाओं पर हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

विज्ञापन
Uttarakhand High court Told Government tO Submit Plan in Court for  Save Environment
नैनीताल हाइकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाइकोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को बचाना और विकास कार्यों को करना भी सरकार का काम है। यदि सरकार के पास विकास की ऐसी कोई योजना है तो वह उसे चार सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करे। हाईकोर्ट ने पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र में फैले तथा 60 प्रतिशत से कम घनत्व वाले वनों को वन नहीं मानने के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को उक्त निर्देश दिए।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सनुवाई हुई। नैनीताल निवासी पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत, विनोद पांडे और रेनू पाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर कर कहा था कि 21 नवंबर 2019 को उत्तराखंड के वन एवं पर्यावरण अनुभाग ने उत्तराखंड में पांच हेक्टेयर से कम या 60 प्रतिशत से कम घनत्व वाले वनों को वनों की श्रेणी से बाहर रख दिया। बता दें कि सरकार के इस आदेश पर कोर्ट ने पहले ही रोक लगाई हुई है।
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह आदेश एक कार्यालयी आदेश है, जिसे लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि न तो यह शासनादेश है और ना ही कैबिनेट में पास हुआ है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए यह आदेश जारी किया है। सरकार के इस आदेश पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी कहा था कि प्रदेश सरकार वनों की परिभाषा न बदले। उत्तराखंड में 71 प्रतिशत वन होने के कारण नदियों व सभ्यताओं का अस्तित्व बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश में 71 फीसदी वन क्षेत्र
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि फॉरेस्ट कन्जर्वेशन एक्ट-1980 के तहत प्रदेश में 71 प्रतिशत वन क्षेत्र घोषित है, जिसमें वनों की श्रेणी को भी विभाजित किया हुआ है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिन्हें किसी भी श्रेणी में नहीं रखा गया है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि ऐसे क्षेत्रों को भी वन क्षेत्र की श्रेणी में शामिल किया जाए ताकि इनके दोहन या कटान पर रोक लग सके। 


यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने भी 1996 के गोडा वर्मन बनाम केंद्र सरकार के आदेश में कहा है कि कोई भी वन क्षेत्र चाहे उसका मालिक कोई भी हो, उसे वनों की श्रेणी में रखा जाएगा। वनों का अर्थ क्षेत्रफल या घनत्व से नहीं है। विश्वभर में जहां 0.5 हेक्येटर क्षेत्रफल में पेड़ पौधे हैं या उनका घनत्व 10 प्रतिशत है, उनको भी वनों की श्रेणी में रखा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed