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हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को गठित नई एसआईटी की निरस्त, जांच अधिकारी के तबादले पर रोक

Wed, 09 Jan 2019 06:41 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 09 Jan 2019 06:41 PM IST
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Uttarakhand high court terminated SIT for scholarship scam
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हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग में करीब 500 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रहे डा. टीसी मंजूनाथ के तबादले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार की ओर से आईजी संजय गुंज्याल की अध्यक्षता में गठित नई एसआईटी को भी निरस्त किया। कोर्ट ने कहा कि जांच को प्रभावित करने के लिए ही एसआईटी के अध्यक्ष और उसकी टीम को बदला गया। मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया तो कोर्ट ने शासन की कार्यवाही पर भी सवाल उठाया। 

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देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान की याचिका पर बुधवार को सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश  रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने कहा कि शीतकालीन अवकाश होने वाला है। शासन केवल कार्यवाहियों को विलंबित करने के उद्देश्य से समय की मांग कर रहा है। कोर्ट पहले भी दो बार मुख्य सचिव के शपथ पत्र पर असंतोष जाहिर कर चुका है। उनसे नौ जनवरी को विस्तृत शपथ पत्र पेश करने को कहा गया था।
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सरकार ने मंगलवार को हरिद्वार के यातायात पुलिस अधीक्षक और एसआईटी प्रभारी डा. टीसी मंजूनाथ का तबादला किया था। उनकी जगह आईजी संजय गुंज्याल को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया और छह सदस्यीय नई टीम को तीन माह में जांच पूरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया और कहा कि डॉ. मंजूनाथ हरिद्वार में ही रहेंगे और इस मामले की जांच करेंगे। जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से पूर्व एसआईटी अध्यक्ष व टीम को बदला गया। इससे प्रकरण को दबाने की मंशा साबित होती है। सरकार की ओर से कहा गया कि नई एसआईटी के अध्यक्ष आईजी स्तर के अधिकारी हैं और इस टीम की जांच का दायरा पूरा राज्य है। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 11 फरवरी को करेगी।  

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डॉ. मंजूनाथ ने कहा था कि जांच में सहयोग नहीं कर रहे

पूर्व में हाईकोर्ट में पेश हुए डा. मंजूनाथ ने कहा था कि समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति बांटने में सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। कोर्ट को दिए गए शपथपत्र में डॉ. मंजूनाथ ने यह भी कहा था कि जांच में समाज कल्याण विभाग के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। एसआईटी सामान्य लोगों से मिले दस्तावेजों के सहारे ही जांच कर पा रही है। ऐसे में बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि जांच को दबाने की मंशा से ही डा. मंजूनाथ का तबादला किया गया और एसआईटी टीम को बदला गया। 

शासन के खिलाफ भी सख्त टिप्पणी 
नैनीताल। इस मामले में कोर्ट में समाज कल्याण विभाग और मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र देकर दाखिल की गई जांच रिपोर्ट से भी कोर्ट असंतुष्ट रहा था। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने मुख्य सचिव को नौ जनवरी को विस्तृत जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। मुख्य सचिव की ओर से बुधवार को शपथपत्र पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय और मांगा गया तो कोर्ट ने खासी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने यहां तक कहा कि कार्यवाही को लटकाने के लिए ही समय की मांग की जा रही है। 

सरकार बताए, क्यों न सीबीआई जांच कराई जाए

सरकार की सुस्ती से नाराज कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2018 की सुनवाई में यह भी कहा था कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याची रवींद्र जुगरान ने छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में सीबीआई जांच की ही मांग की हुई है। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी गठित है।

इसके बाद भी कोई रिपोर्ट सामने न आने से नाराज कोर्ट ने एसआईटी के प्रभारी डा. टीसी मंजूनाथ को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। डा. मंजूनाथ ने कोर्ट में कहा कि छात्रवृत्ति में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

याची के अधिवक्ता एमसी पंत के मुताबिक 14 दिसंबर 2018 को सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा था कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। याचिका 13 दिसंबर 2018 को दाखिल हुई थी। करीब छह सुनवाई इस मामले में हो चुकी हैं।

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