बाल विवाह रोकने को हाईकोर्ट का सरकार को सख्त आदेश, हर जिले में नियुक्त हों अधिकारी
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हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर रोक लगाने के लिये सभी जिलों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्ति करने का आदेश सरकार को दिया है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रदेश में नियमावली 2016 में तैयार कर ली गई थी।
कोर्ट ने इस नियमावली और बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रसार के लिये सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नैनीताल की सामाजिक कार्यकर्ता चंपा उपाध्याय ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की समस्या अधिक है।
23 जनवरी से 29 जनवरी के बीच पिथौरागढ़ और चंपावत जनपद में किये गये सर्वे में यह सामने आया है कि स्कूल छोड़ने के मामलों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। याची की ओर से कोर्ट यह भी बताया गया कि बाल विवाह का समाज पर भी प्रभाव पड़ता हैं।
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बाल विवाह पर रोक लगाने के लिये सरकार की ओर से वर्ष 2016 में नियमावली तैयार की गयी है। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने इस मामले को सुनने के बाद 12 नवंबर को जनहित याचिका निस्तारित की थी। इस आदेश की प्रतिलिपि याची के अधिवक्ता को बृहस्पतिवार को मिली ।