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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने पंचायतों में आरक्षण को ठहराया सही, चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Thu, 19 Sep 2019 09:48 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Sep 2019 09:48 AM IST
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Uttarakhand High Court rejected petition Against Panchayat Election 2019 Reservation
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

हाईकोर्ट ने राज्य में पंचायत चुनाव के लिए सीटों के तय किए गए आरक्षण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार के स्तर से पंचायतों की आरक्षण प्रक्रिया सही है।

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सरकार ने कहा था कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के कारण भी जनहित याचिका पर विचार संभव नहीं है और यह निरस्त होने योग्य है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष ऊधमसिंह नगर के किच्छा निवासी लाल बहादुर कुशवाहा की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
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याचिका में पंचायत चुनाव के लिए सरकार के स्तर से 13 और 22 अगस्त को जारी किए गए नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए कहा गया था कि सरकार ने पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को दो भागों में विभाजित किया है।
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पहला ये कि ग्राम पंचायत के चौथे चक्र में आरक्षण लागू करने की व्यवस्था की है। दूसरा, वे ग्राम पंचायतें जिनमें नए वार्ड बने हैं या जिनमें 50 प्रतिशत नए सदस्य जुड़े हैं या कोई नई ग्राम पंचायत बनी है, उनके लिए प्रथम चक्र के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 के प्रावधान लागू हैं। सरकार की यह व्यवस्था इस अधिनियम के विरुद्ध है। याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के आरक्षण नोटिफिकेशनों को निरस्त करने की मांग की गई थी।

सरकार की ओर से कहा गया कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के कारण जनहित याचिका पर विचार संभव नहीं है और निरस्त होने योग्य है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

दो से अधिक बच्चों के मामले में गुरुवार को होगा फैसला 

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने के मामले में हाईकोर्ट बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाएगी। इस प्रकरण में पूर्व में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद तीन सितंबर को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। 

मामले के अनुसार नया गांव कालाढूंगी निवासी मनोहर लाल आर्या, जोत सिंह बिष्ट, घोषिया रहमान सहित कई अन्य लोगों ने अलग अलग याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार की ओर से 2019 में पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर दो बच्चे से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है जो कि गलत है। याचिका में कहा था कि सरकार की ओर से इस संशोधन को  बदलाव के बाद पिछली डेट से लागू कराया जा रहा है, यह नियम विरुद्ध है। 

याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना था कि अगर किसी एक्ट में बदलाव किया जाता है तो उसको लागू करने से पूर्व 300 दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से यह ग्रेस पीरियड नहीं दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार के दो बच्चों से अधिक के व्यक्ति के चुनाव लड़ने वाले बदलाव के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में प्रधान के उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाएगा।

साथ ही याचिका में हाई स्कूल पास होने की बाध्यता को भी चुनौती दी गई है। एक्ट के संशोधन में यह भी कहा गया है कि को-ऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य भी दो से अधिक बच्चे होने के कारण चुनाव नही लड़ सकते हैं, लेकिन गांवों में प्रत्येक सदस्य किसी न किसी को-ऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य होता है। इस तरह से तो पहाड़ी राज्य होने के कारण पहाड़ में ग्राम प्रधान का सदस्य चुनना या मिलना मुश्किल हो जाएगा।

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