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उत्तराखंड: शांतिकुंज भगदड़ केस की फाइल हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश
Mon, 21 Sep 2020 11:16 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 21 Sep 2020 11:16 PM IST
सार
- हरिद्वार में हवन के दौरान मची भगदड़ में 20 लोगों की मौत का मामला
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट में आज शांतिकुंज हरिद्वार में आठ नवंबर 2011 को हवन के दौरान मची भगदड़ में 20 लोगों की मौत और 67 लोगों के घायल होने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर संबंधित केस की फाइल कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्तूबर की तिथि नियत की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि संबंधित केस का पूरा रिकॉर्ड गायब कराया जा चुका है ताकि केस दोबारा से खुल न सके।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि शांतिकुंज हरिद्वार के परमाध्यक्ष प्रणव पंड्या ने अपने गुरु श्रीराम शर्मा की 8 नवंबर 2011 को जन्म शताब्दी मनाई थी। इसमें अलग-अलग राज्यों के पांच मुख्यंत्रियों सहित कई वीआईपी समेत करीब एक लाख लोग शामिल हुए थे।
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शांतिकुंज परिवार ने वीआईपी व आम जनता के हवन की अलग-अलग व्यवस्था की थी। सामान्य लोगों के लिए हवन वाले स्थान पर भगदड़ मचने से 20 लोगों की मौत और 67 लोग घायल हो गए थे। मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। याचिका में कहा कि जब जांच समाप्त हुई तो सरकार ने केस रफा-दफा कर दिया।
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सरकार ने कहा था कि लोकहित देखते हुए वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से प्रार्थना की थी कि मामले की फिर से जांच की जाए। क्योंकि इतने बड़े आयोजन में पुलिस की सहायता नहीं ली गई और न ही पीड़ितों को इसका मुआवजा ही दिया गया है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर संबंधित केस की फाइल कोर्ट में पेश करने को कहा है।