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उत्तराखंड: फर्जी शिक्षकों के मामले में तीन महीने में जांच कर रिपोर्ट हाईकोर्ट में देने के निर्देश
Mon, 28 Dec 2020 09:31 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 28 Dec 2020 09:31 PM IST
सार
- सरकार ने जांच के लिए हाईकोर्ट ने मांगा था छह माह का समय
- विभिन्न स्कूलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति शिक्षकों का मामला
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- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
नैनीताल हाइकोर्ट में आज फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद राज्य सरकार को तीन माह में सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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सोमवार को सरकार ने कोर्ट से सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के लिए छह माह का समय मांगा था लेकिन कोर्ट ने तीन माह के भीतर सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी हल्द्वानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त पाई है।
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इनमें से कुछ अध्यापकों की एसआईटी जांच की गई। जिनमें से खचेड़ू सिंह, ऋषिपाल और जयपाल के नाम सामने आए, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सभी को क्लीन चिट दे दी गई।
इसके बाद से ये सभी अब भी विद्यालयों में कार्यरत रह कर सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व में राज्य सरकार ने अपने शपथपत्र में कहा था कि मामले की एसआईटी जांच चल रही है जिसमें अभी तक 84 अध्यापक जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पाए गए हैं। इन पर विभागीय कार्यवाही चल रही है।