हाईकोर्ट में विरोधाभासी बयान देने पर हिरासत में रहे हिमालयन आयुर्वेदिक कालेज के प्रधानाचार्य
- हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज में फीस वृद्धि संबंधी आदेश की अवमानना मामले में हुई सुनवाई
- हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कॉलेज के निदेशक को 3 मार्च को कोर्ट में पेश होने के दिए हैं निर्देश
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नैनीताल हाईकोर्ट में विरोधाभासी बयान देने पर हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल झा को करीब पौने तीन घंटे तक हाईकोर्ट के आदेश पर हिरासत में रखा गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 मार्च की तिथि नियत करते हुए कॉलेज के निदेशक को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कॉलेज के छात्र मनीष कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा है कि पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कॉलेज के छात्रों से ली गई बढ़ी हुई फीस को लौटाने का आदेश दिया था।
इस आदेश के खिलाफ कॉलेज ने विशेष अपील दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। याचिका में कहा गया कि पूर्व में पारित बढ़ी हुई फीस लौटाने के आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया।
3 मार्च को होगी सुनवाई
इस कोर्ट ने कॉलेज के प्रधानाचार्य को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान विरोधाभासी बयान पर हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य को हिरासत में लेने के आदेश दे दिए। कोर्ट के इस आदेश पर उन्हें सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर करीब सवा बजे तक हिरासत में रखा गया।
याचिका में कहा गया था कि कॉलेज ने बीएएमएस की सालाना फीस 80 हजार से बढ़ाकर दो लाख 15 हजार रुपये कर दी थी। इस शासनादेश को कोर्ट ने निरस्त करने के साथ ही छात्रों से ली गई बढ़ी हुई फीस लौटाने का आदेश दिया था। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई के लिए 3 मार्च की तिथि नियत करते हुए कॉलेज के निदेशक को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास भत्ते व अन्य सुविधाओं पर खर्च मामले में सुनवाई जारी
हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास भत्ते व अन्य सुविधाओं पर हुए खर्च के मामले में राज्य सरकार की ओर से पारित एक्ट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। मंगलवार को भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने हाईकोर्ट में राज्य सरकार के उस एक्ट को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है जिसमें राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया किराए को माफ कर दिया था।