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उत्तराखंड में ठोस कचरा प्रबंधन पर अब हाईकोर्ट की सख्ती, शहरी विकास सचिव से जवाब-तलब

Tue, 18 Sep 2018 11:19 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 18 Sep 2018 11:19 PM IST
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Uttarakhand high court order for Solid waste management
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट - फोटो : file photo

प्रदेश में ठोस कचरा निस्तारण का मामला भी अब हाईकोर्ट तक  जा पहुंचा है। केंद्रीय पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि कूड़े को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करना निकायों की जिम्मेदारी है।

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कोर्ट ने अधिवक्ता डी बर्थवाल को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त करते हुए प्रदेश के शहरी विकास सचिव को रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं का संज्ञान लेते हुए तीन सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। 
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हाईकोर्ट ने ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में 16 मार्च 2017 को एक आदेश पारित कर सरकार को ठोस कचरा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था करने को कहा था। मंगलवार को अधिवक्ता बर्थवाल ने एक समाचार पत्र में केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट को कोर्ट के सामने रखा। 

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Uttarakhand high court order for Solid waste management
हाईकोर्ट

कोर्ट ने पाया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 2016 में बनाए गए नियमों का पालन नहीं हो रहा है। नगर निगमों, नगर पालिकाओं के पास कूड़ा निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।

नगर पालिका देहरादून, हरिद्वार ने कूड़ा निस्तारण के लिए अभी जगह ही चिह्नित की है और नैनीताल को पर्यावरण मंत्रालय से कूड़ा निस्तारण के लिए अनुमति मिली है। रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य में खुले में कूड़ा फेंका जा रहा है।

87 डंपिंग साइट चिह्नित किए गए हैं, जहां प्रतिदिन 917 टन कूड़ा फेंका जा रहा है। अब तक किसी भी नगर पालिका से कूड़ा निस्तारण के मामले में संतोषजनक रिपोर्ट नहीं मिली है। कोर्ट ने इस मामले को एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए तीन अक्तूबर को सुनवाई करना तय किया है।

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