यूपी आवास विकास परिषद् को उत्तराखंड हाईकोर्ट का नोटिस, 22 करोड़ रुपये मुआवजा देने के निर्देश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को तीन माह के अंदर दून निवासी हरिहर लाल को 22 करोड़ रुपये का मुआवजा अदा करने का आदेश दिया है।
परिषद ने 1980 में हरिहर की जमीन का अधिग्रहण किया लेकिन मुआवजा अदा नहीं किया था। पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने भी हरिहर को संपूर्ण मुआवजा अदा किए जाने का आदेश दिया था और इसी आदेश के खिलाफ परिषद ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील याचिका दाखिल की थी।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई में परिषद की विशेष याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम में यह प्रावधान है कि भूमि का पूरा मुआवजा अदा करने के बाद ही कास्तकार की भूमि पर कब्जा लिया जा सकता है।
नए भूमि आध्याप्ति अधिनियम की धारा 38(2) के तहत तीन माह के भीतर मुआवजा देने का प्रावधान है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा और तीन माह के भीतर संपूर्ण प्रतिकर सहित याची को भुगतान करने का आदेश दिया।
पूर्व में हरिहर लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी भूमि का वर्ष 1980 में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अधिग्रहण किया था। 38 वर्ष बीत जाने के बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया।
मुआवजे की धनराशि में से आवास विकास परिषद ने मात्र छह करोड़ रुपये ही जमा कराये थे। एकलपीठ ने एसएलओ देहरादून को निर्देश दिए थे कि वे उसकी भूमि का मुआवजा निर्धारित कर उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद से मुआवजा जमा कराएं और आवास विकास परिषद संपूर्ण धनराशि का भुगतान हरिहर को करे।