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उत्तराखंड: कुंभ मेले की तैयारियों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, सीएस से पूछा-केंद्र से जारी एसओपी का कितना हो रहा पालन

Mon, 22 Feb 2021 09:08 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Feb 2021 09:08 PM IST
सार

  • तीन मार्च तक कुंभ मेले की तैयारियों से संबंधित सूची पेश करने के निर्देश

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Uttarakhand High court Not satisfied to Kumbh Mela Preparations
हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड सरकार ने सोमवार को हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश किया लेकिन हाईकोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने तीन मार्च तक कुंभ मेलाधिकारी और  प्रदेश के मुख्य सचिव को तैयारियों से संबंधित सूची शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। 

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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ ने क्वारंटीन सेंटरों की बदहाली और कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
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सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने कोर्ट को बताया गया कि यदि डीआरडीओ की ओर से 1000 बेड के अस्पताल को हरिद्वार में संचालित किया जाएगा तो उसके लिए राज्य सरकार स्टाफ की पूरी व्यवस्था करेगी। कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो सेना के चिकित्सकों की उपलब्धता भी कुंभ मेले में की जाएगी।
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मुख्य सचिव से हाईकोर्ट का सवाल: हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा कि केंद्र से जारी मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर कितना अमल किया जा रहा है। हरिद्वार में कोरोना टीकाकरण की क्या स्थिति है? हरिद्वार में कितने लोगों को वैक्सीन लगा दी गई है और कुंभ मेले के लिए मेडिकल स्टाफ की क्या स्थिति है। 

कोर्ट का मेला अधिकारी से सवाल: कुंभ को लेकर क्या-क्या तैयारिया की गईं हैं और कितने कार्य शेष हैं। शेष कार्यों की सूची बनाकर शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कुंभ मेले को लेकर अब भी हरिद्वार में फ्लाई ओवर और आंतरिक सड़कों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है।


इनकी याचिका पर हुई सुनवाई: अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में क्वारंटीन सेंटरों और कोविड अस्पतालों की बदहाली सहित उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों की मदद, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कीं थीं।

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