फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Government Submits Affidavit in High court for Amendment of mining policy

सरकार ने हाईकोर्ट में दिया शपथपत्र, लिखा- आपदा में बह जाती है जमीन, इसलिए नीति में करना पड़ रहा संशोधन

Wed, 24 Feb 2021 11:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 24 Feb 2021 11:42 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Government Submits Affidavit in High court for Amendment of mining policy
हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

वर्ष 2001 की खनन नीति में संशोधन किए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश किया। हाईकोर्ट ने संशोधित खनन नीति पर पूर्व में रोक लगा दी थी। बुधवार को पेश किए गए शपथपत्र में सरकार ने कहा कि उत्तराखंड में आपदा के दौरान अधिकतर जमींदारों की भूमि भूस्खलन में बह जाती है। इसके कारण उनके पास भूमि नहीं रह जाती है। इसलिए सरकार को 2001 की खनन नीति में संशोधन करना पड़ रहा रहा है। 

विज्ञापन


याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने मामले में आपत्ति दर्ज कराने के लिए कोर्ट से दो सप्ताह का समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष बाजपुर निवासी रमेश लाल की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्य सरकार ने 2001 की खनन नीति को 5 मई 2020 को संशोधित करते हुए नदी तटों से लगी भूमि पर खनन की अनुमति निजी लोगों को दे दी थी। इन नीति पर कोर्ट ने रोक लगाते हुए कहा था कि नदी के किनारों की भूमि न तो किसी व्यक्ति की संपति हो सकती है और ना ही सरकार नदी का दायरा बदल सकती है। इसी मामले में बुधवार को सरकार ने शपथपत्र पेश किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कॉलेजों की संबद्धता मामले में केंद्र सरकार, अन्य से मांगा जवाब
हेमवती नंदन बहुगुणा (एचएनबी) केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय श्रीनगर से संबद्ध किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दोनों विश्वविद्यालयों और अन्य को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 

मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय श्रीनगर से संबद्ध किए जाने को केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। 


पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कोई अंतरिम राहत न देते हुए यूजीसी, राज्य सरकार, एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, डीएवी कॉलेज देहरादून सहित अन्य को दो सप्ताह से भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed