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छेड़खानी से तंग छात्राओं को एस्कॉर्ट सुविधा के सवाल पर सरकार का गोलमोल जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 14 Jul 2018 10:51 AM IST
मदन कौशिक
मदन कौशिक - फोटो : SELF
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देहरादून में शोहदों की छेड़खानी से तंग छात्राओं को एस्कॉर्ट सुविधा उपलब्ध कराने के सवाल पर सरकार से जवाब देते नहीं बना। सुविधा को सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण बता रहे शासकीय प्रवक्ता कानून व्यवस्था की खराब स्थिति के सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने गोलमोल जवाब देकर सरकार का बचाव करने का प्रयास किया। 
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शुक्रवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। छात्राओं की शिकायत मिलने के बाद सचिव ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उनके लिए व्यवस्था की, यह सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। हालांकि राजधानी में इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी जैसे सवालों का वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। कानून व्यवस्था में खामी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को पहले ही ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने छेड़छाड़ की घटनाओं पर लगाम के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड बनाए जाने की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि राज्य में इसकी आवश्यकता नहीं है।

यह है मामला
गवर्नर्स अवॉर्ड-2018 में बृहस्पतिवार को मेधावियों के सम्मान के बाद राजभवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सचिव विद्यालयी शिक्षा डा. भूपिंदर कौर औलख ने छात्राओं को एस्कॉर्ट सुविधा दिए जाने की जानकारी दी थी। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कई छात्राओं ने छेड़खानी और फब्तियां कसे जानी की शिकायत की थी। इसको देखते हुए न केवल छात्राओं को एस्कॉर्ट सुविधा देने का फैसला किया गया है बल्कि उनके लिए बस की व्यवस्था भी की जा रही है। 

हर लड़की पर करते हैं गंदे-गंदे कमेंट्स
हमें स्कूल आने में बहुत परेशानी होती है। कभी बस और विक्रम नहीं मिलता। हमारी तरफ और मेरी फ्रेंड की तरफ का माहौल भी खराब है। उसने भी मैडम से बात की थी। तब मैडम ने कहा था कि हम कुछ इंतजाम करेंगे गाड़ियों का। मैडम ने यह भी बोला था कि ट्यूशन का भी इंतजाम करेंगे। हम सर्वे एस्टेट की तरफ रहते हैं, वहां ऐसा नहीं है। लेकिन मेरी फ्रेंड के घर की तरफ ऐसा होता है। उसके इधर का माहौल बहुत खराब है। वहां रहने वाली लड़कियां घर से बाहर भी नहीं निकल पातीं। वह इसके कारण ट्यूशन भी नहीं पढ़ पाती, जबकि उसका मन बहुत करता है। वहां का माहौल बहुत खराब है। चावला चौक के पास रहने वाली हमारी कक्षा की छात्राओं ने मैडम से छेड़छाड़ की शिकायत की। उन्होंने बताया कि जिस तरफ वो रहती हैं, वहां लड़के खड़े रहते हैं जो आने-जाने वाली लड़कियों पर गंदे-गंदे कमेंट्स करते हैं। जो उन्हें अच्छा नहीं लगता। 
(राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने शुक्रवार को कैमरे के सामने अपनी पीड़ा बयान करते हुए यह बात कही। छात्रा ने बताया कि छींटाकशी से परेशान कई लड़कियां स्कूल तक छोड़ने की बात कह चुकी हैं।)

सोशल मीडिया पर छाया एस्कॉर्ट का मुद्दा
छात्राओं को एस्कॉर्ट सुविधा देने का शिक्षा विभाग का निर्णय शुक्रवार को पूरे दिन सोशल मीडिया पर छाया रहा। ज्यादातर लोगों ने इसे सरकार और पुलिस प्रशासन की नाकामयाबी बताया। वहीं, कुछ लोगों ने इसे खतरे के संकेत मानते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। लोगों ने योजना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली और पुलिस व्यवस्था पर भी निशाना साधा।

देवभूमि में ऐसा हो रहा है तो इससे बुरे हालात नहीं हो सकते। ये शुरुआत है। अगर हालात पर अभी काबू नहीं पाया गया तो आगे क्या होगा, कल्पना की जा सकती है। 
-अजय कुमार

राजधानी में सुरक्षा के नाम पर दर्पण। शर्म नहीं है। मानवाधिकार आयोग और पहाड़ दोनों इनको देखकर रो पड़े होंगे। धन्य रे लोकतंत्र। 
-राजेंद्र पी बड़ोनी

एस्कॉर्ट्स के बजाय यदि स्कूल खुलते और बंद होते समय रास्ते में पुलिस फोर्स की गश्त बढ़ा दी जाए, विशेषकर जहां छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं, तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
-हरीश चंद्र घिल्डियाल

मतलब देश-प्रदेश की सरकार नाकाम है, बेटियों की सुरक्षा कर पाने में। चलो छात्राओं को एमएलए वाली फिलिंग्स तो आएगी। 
-ठाकुर रेनुजा

छात्रा को एस्कॉर्ट सुविधा देने से वह तो सुरक्षित हो जाएगी लेकिन आरोपियों के हौसले बढ़ जाएंगे। एस्कॉर्ट सुविधा के बजाय कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाना चाहिए। आरोपियों से सख्ती से निपटने की जरूरत है। कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी तो किसी की ऐसी हिम्मत नहीं होगी।
-सरोजनी कैंत्युरा, पूर्व अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग

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