{"_id":"6512a904950db5e9f50e6385","slug":"uttarakhand-government-alert-after-joshimath-disaster-considering-forming-seven-member-committee-2023-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: जोशीमठ आपदा के बाद सरकार सतर्क, डेंजर जोन के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने पर हो रहा विचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: जोशीमठ आपदा के बाद सरकार सतर्क, डेंजर जोन के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने पर हो रहा विचार
Tue, 26 Sep 2023 03:21 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 26 Sep 2023 03:21 PM IST
सार
अपने-अपने जनपदों में जिलाधिकारी इस समिति की अध्यक्षता करेंगे, जबकि अन्य छह इसके सदस्य रहेंगे।
विज्ञापन
आवास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
विस्तार
जोशीमठ आपदा के बाद सरकार सतर्क हो गई है। समस्त जनपदों में डेंजर जोन के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने पर सरकार विचार कर रही है। यह जानकारी आवास मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने दी। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने पर भवनों को सुरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धामी सरकार जोशीमठ आपदा के बाद राज्य के सभी जनपदों में वर्तमान में निर्मित ऐसे भवन जो भूकंप, भू-स्खलन, भू-धंसाव, अतिवृष्टि आदि की दृष्टि से जोखिम भरे भवनों की श्रेणी में आते हैं। उन्हें चिन्हित कर सुरक्षित करने को मानक संचालन प्रक्रिया संबंधी प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
विज्ञापन
अपने-अपने जनपदों में जिलाधिकारी इस समिति की अध्यक्षता करेंगे, जबकि अन्य छह इसके सदस्य रहेंगे। जिलाधिकारी के अलावा इन छह सदस्यों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अथवा सचिव, संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी, लोकनिर्माण विभाग अथवा सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता, सहायक भू-वैज्ञानिक (भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग), आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि और संबंधित नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी रहेंगे।
विज्ञापन
रिपोर्ट में हुआ खुलासा: जोशीमठ में क्षमता से ज्यादा भार, अब न हों भारी निर्माण, 20% भवन रहने योग्य नहीं
विज्ञापन
बताया कि इन सात सदस्यीय समिति में आवश्यकतानुसार कोई भी संबंधित विशेषज्ञ को आमंत्रित सदस्य के रूप में नाम किया जा सकता है। ऐसे असुरक्षित भवनों का भी चिन्हिकरण किया जाएगा, जिन्हें रेट्रोफिटिंग द्वारा सुरक्षित किया जा सकता है। बताया कि समिति इनके चिन्हिकरण के बाद आपदा न्यूनीकरण भवनों को सुरक्षित किये जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगी।