पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हर की पैड़ी मामले में गलती स्वीकारी, त्रिवेंद्र रावत से की यह गुज़ारिश
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को सियासी दांव चलकर हर की पैड़ी मामले की गेंद अब त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के पाले में फेंक दी है। रावत ने हरिद्वार में अखाड़ा परिषद पहुंचकर 2016 में हुए आदेश को लेकर अपनी गलती स्वीकार की।
उन्होंने कहा कि एनजीटी ने गंगा तट से 200 के मीटर के दायरे में निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इससे हरिद्वार के तमाम भवनों पर ढहने का संकट आ गया था। तमाम लोगों ने इससे बचाव का रास्ता निकालने का आग्रह किया। इस पर मेरी सरकार ने फैसला किया कि इन भवनों को बचाने के लिए मां गंगा के प्रवाह को एक तकनीकी नाम (गंगनहर) दे दिया जाए।
इस आदेश से ध्वस्तीकरण तो रूक गया। लेकिन उससे भावनात्मक गलती हो गई। मां गंगा जहां भी जिस रूप में हैं वो गंगा ही हैं।
मां गंगा अपने पूर्ण स्वरूप में प्रवाहमान
हर की पैड़ी पर मां गंगा अपने पूर्ण स्वरूप में प्रवाहमान हैं। सरकारें बदलती रहती हैं। यदि आज की सरकार उस वक्त की मेरी सरकार के फैसले (हर की पैड़ी पर जल प्रवाह को गंगा की जगह गंगनगर नाम देना) को बदलती है तो उन्हें खुशी होगी।
यदि त्रिवेंद्र सरकार कोई फैसला नहीं लेती तो कांग्रेस 2022 में सत्ता में आने पर अपने पुराने आदेश को बदलेगी। गंगा परिषद, अखाड़ा परिषद समेत अन्य साधु-संतों इसके खिलाफ काफी समय से मुखर हैं।
हरीश रावत का कहना है कि सरकार इस शासनादेश को इस समय की स्थिति को देखते हुए रद्द कर सकती है। कैबिनेट के जरिये यह फैसला किया जा सकता है।