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विशेषज्ञ मलबा हटाए जाने के पक्ष में नहीं
देहरादून/ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2013 10:47 AM IST
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सरकार बेशक केदारघाटी से जल्द-से-जल्द मलबा हटवाकर पूजा कराने का जतन कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों की राय इसके ठीक अलग है। भारतीय भू-सर्वेक्षण के विशेषज्ञ मलबा हटाए जाने के पक्ष में नहीं। उनका मानना है कि केदारनाथ में बड़े बोल्डर हटवाकर नीचे प्लेटफार्म तैयार किया जाए। ब्लास्टिंग भूलकर भी न की जाए, इसका नकारात्मक असर मंदिर परिसर तक देखने को मिल सकता है। पुनर्निमाण पर पूरी तरह रोक लग जानी चाहिए।
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सुझावों को साथ लेकर चलें
भारतीय भू-सर्वेक्षण के उप-महानिदेशक टीएस पांगती के अनुसार जरूरत इस बात की है कि सरकार जीएसआई के सुझावों को साथ लेकर चले। इस संबंध में महानिदेशक ए सुंदरमूर्ति की भी मुख्य सचिव सुभाष कुमार से बात हुई है। पुनर्वास के लिए भी अलग से रणनीति बनाए जाने की जरूरत है।
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परिसर से मलबा हटाए जाने से कई तरह की दिक्कतें पैदा होंगी। अभी यह स्थान टापू की तरह हो गया है। मलबा हटाने से रिवर बेड प्लेटफार्म से ऊंचा हो जाएगा, जिससे भविष्य में भी यहां पानी की वजह से मुश्किल खड़ी हो सकती है।
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बाईं ओर गाइड वाल, जबकि दाहिनी तरफ जियो जूट विद डीप रूट प्लांटेशन किए जाने की जरूरत है। जियोफिजिकल इंस्ट्रूमेंट से मलबे की थिकनेस का जायजा लिया जाएगा। केदारघाटी के आस-पास बर्फीले तूफान की आशंका के मद्देनजर भी सावधान रहने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने इनके रूट का चिन्हीकरण किया है। अधिक बरसात की वजह से झीलें बड़े नुकसान का सबब न बनें, इसे लेकर यहां से पानी के कालम बना उनकी निकासी की भी व्यवस्था की जा सकती है।
24 गांवों का प्राथमिकता पर अध्ययन
रुद्रप्रयाग-केदारनाथ, रामबाड़ा, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग, कालीमठ, गबनीगांव, चंद्रापुरी, फलई, भटवारी सुनार, देवली, मणिग्राम, लमगौडी, बड़ासू, जाल तल्ला, बडूला सुमाडी, चाका बनीयाडी, नाकोट, सिल्ली उत्तरकाशी-न्यूडिंडसारी, जोशियाड़ा, तिलोथ।
(यह सूची आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की ओर से जारी)
जीएसआई विशेषज्ञ केदारघाटी रवाना
जीएसआई के दो विशेषज्ञ बुधवार को केदारघाटी रवाना हो गए। यह अधीक्षण भू-विद् पीवीएस रावत और वरिष्ठ भू-विद् हरीश बहुगुणा हैं। बृहस्पतिवार को दो और विशेषज्ञ वहां के लिए रवाना होंगे। इनमें एमके राय और संजय कुमार सिंह को रखा गया है। दोनों लखनऊ से यहां पहुंचे हैं।
पहले चरण में पांच जिलों का जायजा
जीएसआई की टीम पहले चरण में पांच जिलों का जायजा लेगी, जहां सर्वाधिक नुकसान की आशंका है। यह जिले हैं रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़। पांच टीमें तैयार की गई हैं, जिनमें 21 विशेषज्ञ शामिल होंगे। चमोली के लिए टीम आने वाली छह अगस्त को रवाना होगी, जबकि पिथौरागढ़ के लिए आने वाली 10 अगस्त को।
जीएसआई यूनिट का होगा अपग्रेडेशन
भारतीय भू-सर्वेक्षण की दून स्थित फील्ड यूनिट का अपग्रेडेशन होगा। महानिदेशक ए सुंदरमूर्ति ने यह बात कही। यूनिट के महत्व को देखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है। इसके अलावा यहां कई अन्य डिवीजन भी खुलेंगे। अभी मार्च तक के लिए यहां 21 अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। इसके पश्चात पूर्णकालिक रूप से तैनाती होगी।
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