केदारनाथ आपदा में मरी महिला डेढ़ साल बाद मिली जीवित
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केदारनाथ आपदा में पति से बिछड़ी राजस्थान की लीला कंवर आखिरकार डेढ़ साल बाद उत्तरकाशी में मिल गई है। त्रासदी के बाद मानसिक संतुलन खो चुकी महिला डेढ़ साल से गंगोरी में घूम रही थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इसकी पड़ताल तक नहीं की। सरकार ने इस महिला को मृत घोषित कर पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि भी दे दी थी।
राजस्थान के भीकमपुरा अलवर का 45 सदस्यीय यात्री दल जून 2013 में केदारनाथ यात्रा पर आया था। इसमें वाहन चालक विजेंद्र कंवर तथा उनकी पत्नी लीला कंवर (45) भी थे।
आपदा के कारण सभी यात्री एक-दूसरे से बिछड़ गए थे। चालक विजेंद्र तभी से अपनी पत्नी की तलाश कर रहा था। इस बीच सरकार ने उसे मृत घोषित कर पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा भी दे दिया था, लेकिन विजेंद्र कंवर ने अपनी पत्नी की खोजबीन नहीं छोड़ी। अंततः डेढ़ साल बात विजेंद्र की मेहनत रंग लाई और अपनी पत्नी को घर ले गए।
लीला जब अपने अलवर स्थित घर पहुंचीं तो बेटा सागर मां को देखते ही रोने लगा। विजेंद्र कंवर का कहना था कि मेरी पत्नी की स्थिति अभी उतनी अच्छी नहीं है और वह लोगों से बात नहीं कर रही हैं। बेटे सागर ने बताया कि मां को कुछ भी याद नहीं है, लेकिन जब बहन और बहनोई जाने लगे तो उन्होंने तिलक लगाकर विदाई दी। इसलिए हम लोगों ने अभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है।
किसी से कोई बात नहीं करती थी
बीते मंगलवार को वह उत्तरकाशी पहुंचा तो गंगोरी में उसे अपनी पत्नी विक्षिप्त हालत में घूमती मिली। नगर पालिका सभासद हरीश डंगवाल एवं गंगोरी निवासी केशर सिंह पंवार ने बताया कि महिला डेढ़ साल से गंगोरी में घूम रही थी।
वह किसी से कोई बात नहीं करती थी। हाथ में कपड़ों की एक पोटली लेकर शाम को वह जहां छत मिलती वहीं पर रात गुजार देती थी। महिला के पति ने राजस्थान ले जाकर उसका इलाज कराने की बात कही है। उसके पति ने बताया कि उनके यात्री दल में कई लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन उन्हें अपनी पत्नी के जिंदा होने की पूरी उम्मीद थी।
केदारनाथ यात्रा में पति से बिछुड़ी महिला के मिलने की सूचना मिली थी। जिले में विक्षिप्त हालत में घूम रहे लोगों का सत्यापन करने के निर्देश दिए जाएंगे।
-इंदुधर बौड़ाई, डीएम उत्तरकाशी।
पहला मामला सामने आने पर चकराया शासन
शासन के मुताबिक यह पहला मामला है जो इस तरह का सामने आया है। इस मामले में अब मुआवजे की राशि की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होगी। हालांकि शासन ने इस मामले को परीक्षण पर रखा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक दस लाख की राशि में से इलाज खर्च के लिए भी राशि देने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने आपदा में घायलों के लिए डेढ़ लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया था।
आपदा के स्वरूप को देखते हुए जून 2013 के बाद सरकार ने लंबे समय से लापता लोगों को मृत मानते हुए प्रमाणपत्र जारी किए थे। उस समय जारी गाइडलाइन में साफ कर दिया गया था कि लापता लोगों के मिलने पर राशि वापस भी ली जा सकती है।
इस बीच सरकार के सामने करीब 14 मामले इस तरह के सामने आए। इनको लापता की सूची में दर्ज कराया गया था पर बाद में खोजबीन में से मिल गए थे। इनमें से किसी को मुआवजा नहीं दिया गया था। यह पहला मामला है जब मुआवजा राशि जारी होने के बाद मृत मान ली गई महिला मिली है। कुछ मामले ऐसे भी आए जो पूरी तरह से फरजी थे। इसके बावजूद इस मामले में भी शासन सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का मन बनाए हुए है।
बताया गया कि जारी की गई मुआवजे की राशि में इलाज का खर्च भी शामिल किया जा सकता है। शासन के एक अधिकारी के मुताबिक इलाज अगर लंबा और महंगा हो तो पूरी राशि को उसमें समाहित किया जा सकता है।