उत्तराखंड के नए डीजीपी के बारे में ये बाते नहीं जानते होंगे
- कानपुर व मेरठ जैसे जिलों में बतौर एसएसपी किया काम
- सोनभद्र से गृहमंत्रालय तक नक्सलवाद पर अंकुश लगाने का अनुभव
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1986 बैच के एमए गणपति ने मद्रास क्रिश्चियन कालेज चेन्नई से अर्थशास्त्र में स्नातक और जेएनयू दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पोस्ट ग्रेजुएट किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी किया। फिर वह भारतीय पुलिस सेवा में चुने गए और उन्हें 1986 बैच व उत्तर प्रदेश कैडर का आवंटन हुआ।
वे मुरादाबाद में एसपी सिटी, सोनभद्र व हरदोई के पुलिस अधीक्षक के अलावा नैनीताल, मेरठ व कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात रहे।
नक्सलवाद और आतंकवाद से भी निपट चुके हैं गणपति
सोनभद्र में उन्होंने नक्सलवाद और नैनीताल में तराई में फैले आतंकवाद को लेकर बेहतर प्रदर्शन किया। मेरठ व कानपुर में उन्होंने कानून व्यवस्था व पुलिस तंत्र को दुरुस्त करने का बेहतर काम किया। वह 1999 में सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर गए और एसपी स्पेशल क्राइम ब्रांच दिल्ली और बाद में प्रमोशन होने पर उन्होंने डीआईजी एंटी करप्शन दिल्ली प्रथम के रूप में काम किया।
इसके बाद वे राज्य में लौटे और पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था बने। इसके बाद उन्होंने करीब दो साल तक आईजी गढ़वाल की जिम्मेदारी संभाली। एडीजी रैंक में प्रमोशन पाकर एडीजी प्रशासन का दायित्व संभाला और उसके बाद पुन: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए।
दिल्ली में वह केंद्रीय गृहमंत्रालय में संयुक्त सचिव नक्सलवाद बने और फिर भाजपा सरकार आने पर उन्हें केंद्र ने संयुक्त सचिव आंतरिक सुरक्षा व मंत्रालय के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी दी। इस जिम्मेदारी से मुक्त होकर वे फिर राज्य में लौटे और अब उन्हें पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी दी गई है।